रायपुर. मानसून के दौरान भारी वर्षा और आसमानी बिजली की संभावना बनी रहती है. मौसम विज्ञान केन्द्र रायपुर और राज्य शासन के आपदा एवं प्रबंधन विभाग द्वारा भारी वर्षा एवं आसमानी बिजली (वज्रपात) के प्रभावों की जानकारी एवं इससे बचाव के उपाय जारी किए गए हैं. आकाशीय बिजली गिरने और अत्यधिक वर्षा के प्रभावों की जानकारी जनसामान्य को दी गई है कि घास-फूस की झोपड़ियों और एस्टेबटस की छत वाले घरों और कारों को नुकसान हो सकता है, छत के टॉप उड़ सकते हैं. अधूरे बंधे धातु की चादरें उड़ सकती है. पेड़ की शाखाओं के टूटने से बिजली और संचार लाइनों को नुकसान पहुंच सकता है तथा खड़ी फसलों को भी नुकसान होता है. बिजली जमीन पर गिरती है. अत्यधिक गरज-चमक के बाद संबद्ध वर्षा के कारण नदी-नालों में अचानक बाढ़ आती है.
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मौसम वैज्ञानिकों ने आम-जनों को बिजली चमकने एवं बादलों की गर्जना के संबंध में सुझाव दिए हैं कि अलग-थलग पड़े पेड़ों के नीचे आश्रय न लें. तालाबों, झीलों और बाहरी पानी वाले क्षेत्र (जैसे धान की रोपाई) से तुरंत बाहर निकलें और दूर रहें. गड़गड़ाहट सुनने के बाद घर के अंदर जाएं या सुरक्षित पक्के आश्रयों की तलाश करें. अंतिम गड़गड़ाहट की आवाज सुनने के बाद 30 मिनट तक घर के अंदर रहें. अगर कोई आश्रय उपलब्ध नहीं है, तो तुरंत उकडू बैठ जाएं. यात्रा के दौरान गरज हो रही हो तो कार या बस, ट्रेन के अंदर ही रहें. बिजली/इलेक्ट्रानिक उपकरण का प्रयोग न करें तथा बिजली की लाइनों से दूर रहें. धातु की डंडी वाले छाते का उपयोग न करें. कपड़े सुखाने के लिए तार प्रयोग न कर, जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करें.
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