पिथौरा. दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के पूर्व मनाया जाने वाला गौरा गौरी पर्व क्षेत्र में उत्साहपूर्वक परंपरा के अनुसार संपन्न हो गया. गुरुवार रात भर गौरा-गौरी की सेवा के बाद शुक्रवार सुबह श्रद्धापूर्वक विसर्जन कर दिया गया. शुक्रवार सुबह क्षेत्र में गौरा-गौरी विसर्जन कार्यकम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. पार्षद राजू सिन्हा ने बताया कि लक्ष्मी पूजन के दिन सुबह से नगर के मुहानों से नगर के विभिन्न मोहल्लों से श्रद्धालु मिट्टी लेकर नगर की आराध्य देवी शीतला मंदिर पहुंचकर वहां गौरा-गौरी की मूर्तियां तैयार करते हैं. बाद रात करीब 8 बजे से एक साथ पूजा के बाद इन्हें श्रद्धालु अपने-अपने मोहल्ले के गौरा चौरा में स्थापित करते हैं. बाद रातभर भजन-कीर्तन के साथ रतजगा किया जाता है. सुबह 10 बजे के बाद गौरा-गौरी को पूरी श्रद्धा के साथ पूजन के बाद इन्हें स्थानीय तालाब में विसर्जन किया जाता है. आज के विसर्जन में नगर के प्रमुख जन उपस्थित थे.
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शाम को होगी गोवर्धन पूजन
अब शाम को गोवर्धन पूजन का कार्यक्रम होगा. स्थानीय पुरानी बस्ती निवासी उमेश दीक्षित ने बताया कि गोवर्धन पूजा का कार्यक्रम प्रतिवर्ष पारम्परिक रूप से मंदिर चौक में आयोजित किया जाता है. इस कार्यक्रम में गोबर का एक पहाड़ बनाया जाता है. इसके ऊपर चरवाहों द्वारा गायों को चलाया जाता है. गायों के चलने के बाद इसी गोबर का टीका लगाकर लोग एक दूसरे को गोवर्धन पूजा की बधाई देते हैं. इसके पीछे माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यह परंपरा प्रारम्भ करवाई थी. भगवान का कथन था कि मेरी या किसी अन्य भगवान की पूजा करने की बजाय प्रकृति की पूजा की जाए. श्रीकृष्ण के इस फैसले से भगवान इंद्र नाराज होकर अतिवृष्टि करवाए थे जिससे ग्रामीणों की रक्षा हेतु श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली से उठाकर ग्रामीणों की रक्षा की थी.
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