रजिंदर खनूजा
पिथौरा. क्षेत्र की प्रमुख जोंक नदी से लगातार अवैध रेत उत्खनन कर जंगलों में रेत का पहाड़ खड़ा किया जा रहा है. हरे भरे पेड़-पौधों के बीच रेत के पहाड़ खड़े होने से अब इस क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ने के कगार पर पहुंच गया है. ज्ञात हो कि जिला खनिज अधिकारी के अनुसार जोंक नदी से रेत उत्खनन कर मात्र बल्दीडीह के चिन्हित स्थान पर ही रेत भंडारण का परमिट जारी किया गया है, पर वर्तमान में नियम विरुद्ध अवैध तरीके से रेत का भंडारण सांकरा से लगे सन्त अन्ना विद्यालय के पीछे जंगल के रास्ते पर किया गया है.
जिससे यहां उगने वाले नए पौधे अभी से मरने लगे हैं. सांकरा क्षेत्र के कुछ लोगों ने बताया कि सांकरा के समीप से गुजरने वाली जोंक नदी में खनिज रेत उत्खनन का पट्टा मुंगेली के दिव्या उप्पल के नाम से है. यह पट्टा 5 हेक्टयर क्षेत्र के लिए दिया गया है. पर स्थल पर चिन्हित 5 हेक्टेयर का उत्खनन पूर्णतः हो चुका है. अब इस पट्टे की आड़ में ही जोंक नदी के अन्य हिस्सों से सैकड़ों हाइवा ट्रक में भर कर रेत के ढेर जंगल में लगाए जा रहे हैं. नदी में रेत उत्खनन के लिए बाकायदा पोकलेन मशीन खुलेआम लगाई गई है. इस मशीन से रेत खनन कर जेसीबी से बड़े ट्रकों में लाद कर जंगल के मुहानों पर भंडार की जा रही है.
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10 हजार की 14 हजार में रेत
सांकरा एवं आसपास के क्षेत्र से गुजरने वाली रेत आम तौर पर बसना एवं सराईपाली क्षेत्र में बेची जाती है. आम दिनों में यह रेत 10 हजार रुपए प्रति डम्फर बेची जा रही है. पर अब पट्टा प्राप्त स्थान पर रेत का भंडार दो माह पूर्व ही समाप्त हो गया है. अब अन्य स्थानों से रेत निकाल कर बेची जा रही है. चूंकि बरसात में उत्खनन बन्द हो जाता है, इसलिए वर्तमान में मशीनों से उत्खनन कर हजारों हाइवा ट्रक रेत भंडार कर जंगल में रेत का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है. अब बरसात आते ही इस आवेश भंडारित रेत की कीमत 14 हजार रुपए वसूली जाएगी.
मात्र बल्दीडीह का लाइसेंस : चंद्राकर
इधर, खनिज अधिकारी श्री चंद्राकर ने बताया कि रेत उत्खनन के लिए पट्टा जारी किया जाता है. इसके भंडारण के लिए मात्र बल्दीडीह में ही स्थान चिन्हित है. अन्य स्थान पर भंडारण नहीं किया जा सकता. जोंक नदी के खसरा नम्बर 628 के भाग का 5 हेक्टेयर को ही लीज पर दिया गया है.
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कुशगढ़ में भी ऐसे ही हालात
जोंक नदी से रेत उत्खनन सांकरा के अलावा कसडोल विकासखण्ड के ग्राम कुशगढ़ में भी हो रहा है. यहां भी अब तक सैकड़ों डम्फर रेत के पहाड़ जंगलों में बनाए जा चुके हैं. अब रेत माफिया इस भंडारित रेत को बारिश आते ही डेढ़ से दोगुने दर पर बेच कर शासन को करोड़ों का चूना लगाने तैयार हैं.
टेमरी क्षेत्र पर रॉयल्टी नहीं : सरपंच
जोंक नदी के जिस क्षेत्र से सबसे अधिक रेत का उत्खनन किया जा रहा है, वह क्षेत्र टेमरी ग्राम पंचायत के तहत है. टेमरी के सरपंच भोजराज पटेल ने इस प्रतिनिधि को बताया कि जोंक नदी का एक हिस्सा उनके क्षेत्र में है पर उसमें से रेत उत्खनन कर सांकरा की ओर ले जाई जाती है, इसलिए हम लोग इनकी रॉयल्टी नहीं लेते. वहीं सचिव सौमित्री विशाल ने बताया कि वे यहां अभी पदस्थ हुए हैं. अब वे क्षेत्र देखकर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे. बहरहाल, इस नदी से अब तक सैकड़ों डम्फर रेत उत्खनन कर जंगल के मुहानों पर स्टोर कर लिया गया है. जानकारी के अनुसार प्रति डम्फर रॉयल्टी की दर करीब 3000 रुपए है. इससे स्पष्ट है कि मात्र रेत रॉयल्टी घोटाला में ही शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है.
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