रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सार्वजनिक तौर पर भाषायी शालीनता और मर्यादा का ध्यान रखने को कहा है. उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री के पद पर बैठे संवैधानिक प्रमुख के शब्दों और बोलचाल में असंसदीय शब्दों का प्रयोग वांछनीय नहीं है. सुंदरानी ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए एक कार्यक्रम के वायरल वीडियो का हवाला देकर यह नसीहत दी है. उन्होने कहा कि उक्त कार्यक्रम के अंत में वहां मौजूद कांग्रेस नेताओं को मिठाई खिलाने के दौरान जब रायपुर के महापौर प्रमोद दुबे ने भी दो हज़ार वोटों से जीतने पर मुख्यमंत्री के हाथों मिठाई खाने की इच्छा जताई तो मुख्यमंत्री बघेल ने महापौर दुबे को यह कहकर मिठाई खिलाने से इंकार कर दिया कि तोला काबर खवाहूं ….., तैं ख़ुद खा ……. तैं हमर करा टिकिट मांगे ल आये रेहेस का?
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तोर नाम इंहा फ़ाइनल हो गिस, तब देखने हमन. सुंदरानी ने कहा कि इसी दौरान मुख्यमंत्री ने महापौर दुबे को गालियों से नवाज़ा. मुख्यमंत्री का यह व्यवहार एक वर्ग-विशेष के प्रति उनके उसी दुराग्रह को प्रदर्शित करता प्रतीत हो रहा है, जो मुख्यमंत्री के पिता इस वर्ग-विशेष के लिए कई बार सार्वजनिक तौर पर व्यक्त कर चुके हैं. उन्होने इस समूचे वाकये में मुख्यमंत्री के कथन को पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए कहा कि दूसरों के वस्त्रों और आचरण पर फिज़़ूल की टीका-टिप्पणी करके चर्चा में बने रहने की लालसा से ग्रस्त मुख्यमंत्री बघेल से राजनीतिक और भाषायी शालीनता की अपेक्षा तो बेमानी ही है, लेकिन दूसरों को ज्ञान बांटने से पहले मुख्यमंत्री को अपनी भाषायी मर्यादा और सार्वजनिक तौर पर अपने राजनीतिक आचरण पर ध्यान देना चाहिए. सुंदरानी ने कहा कि इस एक उदाहरण ने यह सवाल खड़ा किया है कि जब “स्वनामधन्य सौम्य मुख्यमंत्री” का अपने ही दल के एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार है तो शेष आम कार्यकर्ताओं व लोगों के साथ वे किस तरह पेश आते होंगे?
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