रजिंदर खनूजा
पिथौरा. क्षेत्र की कृषि उपज मंडी अब बंदप्राय है. बावजूद इसके मंडी से प्रतिदिन करीब 300 क्विंटल धान के सौदा पत्रक काटकर 2.2 फीसदी मंडी शुल्क की वसूली हो रही है. मंडी बंद होने से किसान समर्थन मूल्य में अपना धान बेचने के बाद मजबूरी में व्यापारियों को अत्यंत सस्ती कीमत में धान बेचने मजबूर हैं. नगर की कृषि उपज मंडी में क्षेत्र के व्यापारी करीब 300 क्विंटल सौदा पत्रक कटवाते हैं जिससे मंडी शुल्क के नाम से 2.2 फीसदी वसूल की जाती है.
इस संबंध में कुछ किसानों ने बताया कि वे मंडी में धान बेचना चाहते हैं पर मंडी बंद होने से उन्हें व्यवसायियों, ट्रेडर्स एवं राइस मिलर्स के पास पानी के मोल अपनी उपज बेचनी पड़ रही है. अब तक किसानों से व्यवसायी द्वारा मोटा धान मात्र 900 से 1100 के बीच ही धान की क्वॉलिटी देखकर खरीद रहे हैं. मंडी के बारे में किसानों ने बताया कि उन्हें व्यापारियों के पास धान लाने से कोई मना नहीं करता पर मंडी कर्मियों का कहना है कि व्यवसायी स्वयं मंडी आकर सौदा पत्रक भरकर टैक्स जमा कर देते हैं.
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मंडी सचिव मुख्यालय में नहीं
इस प्रतिनिधि द्वारा लगातार तीन सप्ताह मंडी का दौरा किया गया पर कभी भी मंडी सचिव कार्यालय में या मुख्यालय में नहीं मिले. जबकि मंडी के करीब आधा दर्जन कर्मी मंडी प्रांगण में खड़े आपस में बातचीत करते दिखे. जिससे स्पष्ट है कि वे मंडी में किसानों का धान मंगवाकर प्रतिस्पर्धा में अच्छा मूल्य दिलाने के स्थान पर सीधे व्यवसायियों को ही धान बेचने किसानों को बाध्य कर रहे हैं.
सहकारी समिति में उठाव चालू
इधर, सहकारी समिति पिथौरा में लगातार शासकीय धान खरीदी के बाद धान का उठाव न होने के कारण जगह की कमी के चलते कभी भी धान खरीदी में अड़चन होने की खबर छत्तीसगढ़ जनादेश में प्रकाशन के बाद अब धान का परिवहन तेजी से प्रारंभ हो चुका है. समिति सूत्रों के अनुसार अब तक खरीदे गए 18 हजार क्विंटल धान में करीब आधा 9900 क्विंटल धान का परिवहन हो चुका है जिससे अब धान खरीदी अपनी गति से चलने की संभावना है.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) December 21, 2020







