पिथौरा. रोजगार गारंटी योजना में अपनों का नाम जोड़कर बगैर काम कराए ही भुगतान कर गड़बड़ी करने का एक मामला सामने आया है. इस मामले में शिकायत के बाद जनपद पंचायत द्वारा गठित जांच कमेटी ने फर्जी नामों को भुगतान सूची से हटा दिया था, पर ग्राम की रोजगार सहायिका द्वारा ग्रामीणों को धमकाने की खबर मिल रही है. जनपद पंचायत पिथौरा के ग्राम घोंच की रोजगार सहायिका द्वारा ग्रामीणों को धमकाना महंगा पड़ गया है. कोविड-19 के तहत ग्रामीणों के लिए चलाए जा रहे रोजगार गारंटी कार्य में फर्जीवाड़ा उजागर कर हटाने की मांग ग्रामीणों ने की है. ग्राम के 175 से अधिक लोगों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन प्रस्तुत कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी से जांच की मांग की गई है. शिकायत के बाद जनपद पंचायत द्वारा एक 5 सदस्यीय टीम जांच हेतु गठित की गई थी.
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जांच के दौरान उपयंत्री शालू ऐरन द्वारा चल रहे निर्माण कार्य को 27 मई को देखा और इसमें फर्जी रूप से चढ़ाए गए नामों को देख उन्होंने इन फर्जी नामों को कटवा दिया और आगे से गलती न करने की चेतावनी दी गई. जबकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रोजगार सहायिका अपने पति के साथ आकर धमकाती है और सही मापदंड अनुसार कार्य करने के बावजूद मजदूरी में कटौती करती है. अपने चहेतों का नाम बिना काम किए मस्टररोल में दर्ज कराया था, जिसे जांच पश्चात उपयंत्री ने काट दिया है. रोजगार सहायिका का रवैया देखकर ग्रामीणों ने तत्काल रोजगार सहायिका को घोंच से हटाने की मांग की है. यदि रोजगार सहायिका को तत्काल नहीं हटाया गया तो आगे आंदोलन करने की चेतावनी ग्रामीणों ने दी है.
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