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दीया-मूर्ति बनाकर बेचने वालों और छोटे दुकानदारों का नहीं निकल रहा दिवाली खर्च

Published on: November 2, 2021
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रजिंदर खनूजा

पिथौरा. धनतेरस के दिन भी बाजार की सुस्ती ने मध्यम एवं निम्न वर्ग के व्यवसायियों को चिंता में डाल दिया है. महंगाई की मार से इस बार बाजार सूने हैं. पारम्परिक दीया एवं मूर्ति बनाकर बेचने वालों और छोटी दुकान लगाकर दिवाली खर्च निकालने वाले परिवारों पर भारी पड़ रहा है. देश भर में महंगाई का असर क्षेत्र के बाजारों पर भी पड़ रहा है. खासकर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के छोटे किसान मजदूरों पर इसका असर अधिक है. एक व्यवसायी के अनुसार वर्तमान में शासकीय सेवा में लगे लोगों के पास ही खर्च करने के लिए रुपए हैं. शेष ग्रामीण मजदूर एवं छोटे व्यवसायी पूरी तरह कंगाली के कगार पर हैं. इनकी दिन भर की मेहनत मात्र महंगी सब्जी में ही खर्च हो रही है.

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बाद भी ज़ब दीपावली खरीदी की बात आती है तब ये परिवार मात्र औपचारिकता पूरी करने एक सस्ती झालर लाइट या मोमबत्ती खरीदकर ही अपना बमुश्किल गुजारा कर रहे हैं. इस संबंध में दीया, आरती एवं लक्ष्मी मूर्ति बनाकर बेचने वाले सबसे अधिक परेशान हैं. उक्त सामग्री बनाकर बेचने वाले जन्थिर प्रजापति ने बताया कि विगत वर्ष तक दीए 10 रुपए के 5 बेच रहे थे पर इस बार उनकी मेहनत की मजदूरी भी नहीं निकल रही है क्योंकि दीए के भाव अब 10 रुपए के 10 से 12 बिक रहे हैं. जबकि फैंसी दीए 4 से 5 रुपए नग बिक रहे हैं. श्री जन्थिर ने बताया कि उन्हें सरकार द्वारा मिट्टी का सामान पकाने के लिए आवश्यक लकड़ी में भी कोई छूट नहीं दी जा रही जिससे 500 रुपए क्विंटल खरीदकर मिट्टी के सामान पकाए जा रहे हैं. लिहाजा लागत और मेहनत तो बढ़ी है परन्तु अब फायदे की जगह नुकसान होने लगा है. वहीं एक दिव्यांग शंभूलाल प्रजापति ने बताया कि पहले कुम्हारी सामग्री विक्रय से उनका घर परिवार का खर्च चल जाता था.

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पर इस वर्ष दीए विगत वर्षों से महंगी सामग्री खरीदकर मेहनत से बनाए दीए भी आधी कीमत में बेचे जा रहे हैं. बावजूद लोग कम खरीद रहे हैं. इसका कारण तेल की कीमतों में बेहिसाब बढ़ोतरी ही है. इधर, फैंसी दीया एवं मूर्ति बेचने वाले व्यवसायी राजू कोठारी ने बताया कि उनकी दुकान में ज्यादातर फैंसी सामग्री की ही मांग है. ग्रामीण क्षेत्र की ग्राहकी कम है. पर सरकारी कर्मचारियों एवं बड़े किसानों के भरोसे ही बाजार टिका है. वरना छोटे किसान एवं आम आदमी की जेब खाली है. इसलिए इस बार रंगीन चाइना लाइट की मांग अधिक है. उच्च वर्ग की पसंद फैंसी दीए ही बने हुए हैं. परन्तु महंगे तेल ने दीयों की बिक्री को खासा प्रभावित कर दिया है.

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