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‘मुख्यमंत्री जी… आपके आदेश का पालन नहीं कर रहे अधिकारी’

Published on: November 9, 2020
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बागबाहरा. छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य में खरीफ सीजन का धान खरीदी का फरमान जारी किया है पर संबंधित अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर खाद्य विभाग द्वारा वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन हेतु साफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान किए जाने का आदेश जारी किया गया है. किसान पंजीयन के संबंध में अब ऐसे किसान जिनके पास वन अधिकार पट्टा है और उन्होंने इस भूमि पर धान की फसल ली है उनका भी धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन किया जाए. निर्देश में बताया गया है कि साफ्टवेयर में वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन के लिए आवश्यक प्रावधान करने कहा है पर उक्त आदेश के बाद भी पंजीयन करने विभागीय अधिकारी का उदासीन रवैया बना हुआ है.


उल्लेखनीय है कि किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तक निर्धारित थी. उक्त अवधि में वनाधिकार पट्टाधारक किसानों का पंजीयन नहीं किया जा सका है. विगत वर्ष वनाधिकार पट्टाधारी किसानों ने अपनी उपज समर्थन मूल्य में विक्रय किया था पर इस वर्ष उपरोक्त भूमि का पंजीयन नहीं होने से तमाम पट्टाधारी किसान चिंतित हैं. यदि पंजीयन नहीं होगा तो वे धान बेचने से वंचित रह जाएंगे इससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति होगी. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा है कि उनके जनपद क्षेत्र में संचालित 17 खरीदी केन्द्रों में अब तक वन अधिकार पट्टाधारक किसानों का ऑनलाइन पंजीयन नहीं किया जा सका है. पंजीयन न होने से किसान समर्थन मूल्य में धान बेचने से वंचित होंगे जिसके चलते उन किसानों को भारी आर्थिक नुकसान सहना पड़ेगा. इन किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है. वनांचल क्षेत्र के सहकारी समिति खम्हरिया पं क्र 1492 के अंतर्गत आने वाले गांव चोरभट्‌ठी, कोकनाझर, बैहाडीह, जोगीडीपा, डूमरडीह, छिंदौला, खम्हरिया, नवाडीही, फुलझर, धरमपुर, बिजराडीह वन ग्राम क्षेत्र के लगभग साढ़े चार सौ किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है.

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इसी तरह अन्य सहकारी समितियों में भी वनाधिकार के तहत पट्टा प्राप्त किसानों का समर्थन मूल्य में धान खरीदने के लिए पंजीयन नहीं किया गया है. पंजीयन न होने के कारण हजारों किसान समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित हो जाएंगे. ज्ञात हो कि सरकारी फरमान के चलते ग्रामीणों को वनाधिकार पट्टा तो दे दिया गया है लेकिन इन पट्टाधारी किसानों को प्राप्त भूमि का दस्तावेज दुरुस्त नहीं किया गया है और न ही राजस्व विभाग उन किसानों को दी भूमि को ऑनलाइन कम्प्यूटराइज्ड किया गया है इसलिए परेशानी हो रही है. राजस्व विभाग गिरदावरी और ऑनलाइन में जो खसरा अंकित है उसी का पंजीयन कर रहे हैं. सरकार के आदेश पर तमाम वनाधिकार पट्टाधारी किसानों को समिति ने कर्ज भी दिया है.


यदि अब उन किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदी नहीं हो पाएगी तो किसान से कर्ज की वसूली कैसे की जाएगी यह डर समिति को सता रहा है. अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में गंभीर नहीं है. सरकार किसानों की हितैषी होने का ढ़िंढ़ोरा पीटती है पर मैदानी हकीकत कुछ और है. यदि सरकार को किसानों की चिंता होती तो वे समर्थन मूल्य में धान की खरीदी एक नवंबर से करती पर सरकार बहानेबाजी कर नवंबर के बजाए दिसंबर में धान खरीदी का आदेश जारी की है. सरकार के इस आदेश से किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है. सालभर का महत्वपूर्ण त्योहार दीपावली मनाने किसानों को अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को औने पौने दाम पर बेचने विवश होना पड़ रहा है. अध्यक्ष स्मिता चंद्राकर ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों का अविलंब पंजीयन नहीं किया गया तो किसानों के साथ आंदोलन किया जाएगा.

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