बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष और पूर्व शासकीय अधिवक्ता नरेन्द्र चन्द्राकर ने कहा है कि कांग्रेस सरकार का कार्यकाल दो साल पूरा होने जा रहा है पर इन दो वर्षों में एक भी महत्वपूर्ण जनहित में निर्माण कार्य, बड़ी योजना, नया संसाधन, नई सरंचना आदि कोई उल्लेखनीय कार्य खल्लारी क्षेत्र में स्वीकृत नहीं हुआ है जिससे लगता है कि प्रदेश सरकार के नक्शे में खल्लारी क्षेत्र शामिल ही नहीं है और मुख्यमंत्री जी को इस क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि खल्लारी क्षेत्र में वर्षों से अधूरी सिंचाई योजना कोमा, धरमपुर, खल्लारी, कांदाझरी, सितली, जंघोरा, केशवा नाला, तेंदूकोना में स्टाप डेम, विकासखण्ड में व्यवहार न्यायालय, फिरगी छुईहा मार्ग में पुल पड़कीपाली मार्ग सहित बाघामुड़ा, बांसकाटा मार्ग बाघामुड़ा, देवरी मार्ग, कोचर्रा से सालडबरी मार्ग, नरतोरी से तुपकबोरा-छुईहा मार्ग, सोहागपुर से बोड़रीदादर मार्ग,
खैरट-मोखा मार्ग से चिंगारियां मार्ग, टेढ़ीनारा से भिलाईदादर मार्ग, गांजर से मुड़ागांव मार्ग, बागबाहरा कॉलेज से सिर्रीपठारीमुड़ा-कर्मापटपर मार्ग, सुवरमाल से बंधापार मार्ग सहित दर्जनों ग्रामीण सम्पर्क मार्ग कच्चा मिट्टीयुक्त है जिसे डामरीकरण किया जाना वर्षों से प्रस्तावित है. कोई श्रम मूलक उद्योग स्थापना आदि पर कोई पहल ही नहीं हुई है. उन्होने कहा कि इन दो वर्षों में एक भी नया विद्यालय, छात्रावास, चिकित्सालय, नया जल प्रदाय योजना स्वीकृत नहीं हुआ है, फिर भी हमारे जनप्रतिनिधिगण प्रदेश में विकास होने की बात करते हैं. यदि उनकी बात को सच माना जाए, तो इस स्थिति में खल्लारी क्षेत्र के साथ मुख्यमंत्री सौतेला व्यवहार कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर रोजगार का साधन उपलब्ध करने की दिशा में भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. काम के अभाव में खल्लारी क्षेत्र से लगभग 25-30 हजार कुशल, अर्धकुशल मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में अन्य प्रदेश पलायन कर जाते हैं. दीपावली बाद प्रतिदिन हजारों की तादाद में चहुंओर से पलायन होगा. क्षेत्र में मजदूर दलाल सक्रिय हो गए हैं.
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श्री चंद्राकर ने कहा है कि क्षेत्र की जनता वर्तमान सरकार की नाकामी से त्रस्त है. सरकारी कार्यालयों में आम जनता से जुड़े काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं. तहसील, एसडीएम जैसे कार्यालय में निर्धारित समय पर लोगों का काम नहीं हो पा रहा है. छोटे-छोटे कामों के लिए जनता चक्कर लगा रही है पर उनका कोई सुनने वाला नहीं है. प्रदेश सरकार और उनके नेता लोगों का ध्यान भटकाने नरुवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी का कैसेट बजा रहे हैं. उन्होने कहा कि ब्लॉक मुख्यालय में अनुविभाग कार्यालय है पर भवन का अभाव है. किसानों तथा आम नागरिकों द्वारा खरीदी-बिक्री जमीन का पंजीयन कराने रजिस्ट्री कार्यालय की स्थापना नहीं हो पाई है जबकि नियमानुसार तहसील पैलेस में रजिस्ट्री विभाग अब तक प्रारंभ हो जाना चाहिए था लेकिन विकासखण्ड बागबाहरा का दुर्भाग्य है कि व्यवहार न्यायालय व रजिस्ट्री कार्यालय की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है.







