पिथौरा. ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ में खबर प्रकाशन के बाद हरकत में आए जिला परिवहन अधिकारी महासमुंद ने शुक्रवार को उड़नदस्ता रायपुर और परिवहन चेकपोस्ट खम्हारपाली के साथ मिलकर यात्री बसों की संयुक्त चेकिंग की. दूसरी ओर बस संचालक विभागीय कार्रवाई को नजरअंदाज करते हुए कल भी बेखौफ होकर मनमर्जी किराया वसूलते देखे गए. जिला परिवहन अधिकारी आरके ध्रुव ने बताया कि रायपुर-सरायपाली मार्ग पर अधिक किराया, बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स, बिना बीमा के संचालित वाहनों पर कार्रवाई की गई.
परमिट शर्तों का उल्लंघन करते पाए जाने पर 24 वाहनों से कुल 49,300 रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया है. इसके अलावा एक वाहन का मोटरयान कर बकाया होने के कारण छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 की धारा 16 (3) के तहत जब्त कर पुलिस थाना तुमगांव की अभिरक्षा में वाहन खड़ी की गई थी. वाहन स्वामी द्वारा बकाया मोटरयान कर 39 हजार रुपए जमा करने के पश्चात वाहन को मुक्त किया गया. कार्रवाई के दौरान 2 वाहनों से 10 हजार रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया. बिना बीमा के संचालित एक वाहन पर कार्रवाई करते हुए 5 हजार रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया.
https://अगले 24 घंटे के अंदर कई जिलों में भारी बारिश की संभावना
अधिक किराया वसूल करते पाए जाने पर 3 वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए 15 हजार रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया. अन्य मामले के तहत कुल 18 वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए कुल 19,300 रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया. इस तरह कुल 24 वाहनों से 49,300 रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया. इसी प्रकार एक स्कूल बस क्रमांक सीजी 04 एमवाय 4907 का मोटरयान कर बकाया होने के कारण 8 हजार रुपए जमा कराकर वाहन मुक्त किया गया. एक ओव्हर लोड मालयान पर कार्रवाई करते हुए 48 हजार रुपए समझौता शुल्क वसूल किया गया.
निर्धारित किराया 125 के स्थान पर 150 रुपए वसूली
परिवहन विभाग की उक्त कार्रवाई के बावजूद निजी बस संचालक प्रशासनिक कार्रवाई को धता बताते हुए पूर्व की तरह ही मनमाना किराया वसूलते रहे. रायपुर से गरीब नवाज बस से पिथौरा आ रहे एक यात्री ने बताया कि उनसे पिथौरा का निर्धारित किराया 125 के स्थान पर 150 रुपए वसूला गया. जब उसने 125 रुपए किराए की बात कही तब उन्हें रास्ते में ही उतरने कहा गया. यात्री ने मजबूरी में 150 रुपए भी दिए और बस स्टैंड की बजाय नगर से दो किलोमीटर दूर फोरलेन पर ही उतरना पड़ा. बस संचालकों की इस मनमानी से क्षेत्र में बस संचालकों के साथ कार्रवाई नहीं कर पाने वाली राज्य सरकार के विरुद्ध आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
https://लोकार्पण समारोह में आदिवासी समाज और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा, आक्रोश








