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धारा-144 की अनदेखी कर जनसुनवाई कराके प्रदेश सरकार किसका हित साधना चाहती थी?

Published on: April 15, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने बस्तर के भनपुरी थाना क्षेत्र के चपका ग्राम में गोपाल स्पंज आयरन प्लांट के लिए जनसुनवाई के दौरान हुए पथराव को लेकर एक सौ लोगों पर एफआईआर होने के बाद प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि जब प्रदेश कोरोना संक्रमण की महाविभीषिका से जूझ रहा है, तब ज़िले में लागू धारा 144 की अनदेखी कर जनसुनवाई कराके प्रदेश सरकार किसका हित साधना चाहती थी. धारा 144 के लागू रहते इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक स्थान पर एकत्रित करके सरकार अपने ही क़ानून की धज्जियाँ उड़ा रही थी. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों समेत ज़िला और पुलिस प्रशासन के वे तमाम अधिकारी भी इसके दोषी मानकर जाँच के दायरे में लिए जाएँ, जिन्होंने इस जनसुनवाई के लिए अनुमति प्रदान की.

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श्री साय ने कहा कि बस्तर ब्लॉक के चपका में प्रस्तावित मिनी इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के लिए सोमवार को हुई जनसुनवाई में क्षेत्रीय विधायक चंदन कश्यप के सामने फूटे जनाक्रोश को प्रदेश की कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली, बदनीयती और कुनीतियों का नतीजा बताया है. अपने पूरे कार्यकाल में कांग्रेस ने झूठ, छलावे और वादाख़िलाफ़ी की जो मिसाल क़ायम की है, उसके चलते अब जनाक्रोश मुखर होकर व्यक्त होने लगा है और हर मुद्दे पर सिर्फ़ सियासी नौटंकियाँ करके लोगों को भरमाने में लगी प्रदेश सरकार के कृत्यों का नतीजा अब कांग्रेस के ही जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होने कहा कि बस्तर से इसकी शुरुआत हो चुकी है और अब पूरे प्रदेश में कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों व नेताओं को जनता से मुँह छिपाकर भागना पड़ेगा. चपका की घटना इस तथ्य और सत्य की तस्दीक कर रही है कि सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है. कोरोना काल में सरकार जनता के साथ खड़ी रहने के बजाय जनता का ध्यान भटकाने और अपने चहेतों को चोर दरवाज़े से लाभ पहुँचाने में लगी है. श्री साय ने कहा कि चपका मामले में अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक नासमझी के चलते सरकार की बदनीयती जगज़ाहिर हो गई है, जिसके चलते कांग्रेस विधायक को अपनी जान बचाने भागना पड़ा और सरगुजा ज़िले के बतौली इलाक़े के चिरगा में निजी एल्युमिना रिफाइनरी के प्लांट के विरोधी ग्रामीणों ने एक सरकारी अधिकारी को पीटा.

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ग्रामीणों ने 144 धारा के कारण जनसुनवाई न करने का आग्रह प्रशासन से किया था जिसकी अनदेखी कर जनसुनवाई की जा रही थी. उन्होने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को जनभावनाओं से खिलवाड़ कर प्रदेश को अराजकता और हिंसक गतिविधियों में धकेलने का गंभीर आरोप लगाया. श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग लगाने के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपना रही है, इसलिए जनता जनसुनवाई के दौरान सरकार का विरोध कर रही है. ज़ाहिर है, यह विरोध राज्य सरकार की नीतियों और नीयत का विरोध है. प्रदेश सरकार इस सच्चाई को समझने और स्वीकार करने में कोई गफ़लत न करे, अन्यथा कांग्रेस के नेता और प्रदेश सरकार के लोग 2023 में अपने राजनीतिक वज़ूद को तलाश कर पाने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे.

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