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सहकारी समितियों की हड़ताल खत्म करने भूपेश सरकार अपना अहंकार छोड़े :  संदीप

Published on: November 19, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी संदीप शर्मा ने कहा है कि प्रदेशभर में धान ख़रीदी करने वाली 2058 सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल को प्रदेश सरकार क़तई गंभीरता से नहीं ले रही है. इस हड़ताल के चलते इस वर्ष फिर किसानों को अपनी उपज सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. उन्होने चेतावनी दी है कि इस वर्ष प्रदेश सरकार किसानों के साथ षड्यंत्र करने से बाज आए और यह सुनिश्चित करे कि किसान समर्थन मूल्य पर अपना धान बिना किसी परेशानी व प्रताड़ना के बेच सकें. श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के इस शासनकाल में किसानों को हर बार अपना धान बेचने के लिए बहुत पीड़ा सहनी पड़ी है.

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किसानों को टोकन देने के बाद भी उनका धान नहीं ख़रीदना, बारदाने की कमी बताकर किसानों को तक़लीफ़ देना, निर्धारित मात्रा से कम धान ख़रीदने के लिए रकबा कटौती, रकबा समर्पण जैसे षड्यंत्र रचना इस नाकारा प्रदेश सरकार की धान ख़रीदी नीति की कुल जमा उपलब्धि है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों से त्रस्त होकर प्रदेश के लगभग 550 किसानों को पिछले तीन साल के कांग्रेस शासनकाल में आत्महत्या के लिए मज़बूर होना पड़ा है. बावज़ूद इसके, प्रदेश सरकार पुरानी गल्तियाँ दुहरा रही है. श्री शर्मा ने कहा कि सहकारी समितियों के कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर हैं, जिन पर किसानों के पंजीयन और धान ख़रीदी का सारा दारोमदार होता है. प्रदेश सरकार इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए कोई समाधानकारी पहल जान-बूझकर नहीं कर रही है. उन्होने चेतावनी दी कि प्रदेश सरकार के किसान-विरोधी चरित्र के चलते अगर इस बार किसानों को धान बेचने में ज़रा भी कठिनाई हुई तो भाजपा किसानों को साथ लेकर प्रदेश सरकार की बदनीयती का माक़ूल ज़वाब देगी. श्री शर्मा ने कहा कि किसानों का धान ख़रीदकर सरकार किसानों पर कोई उपकार नहीं करती है, किसान खून-पसीना एक करके खेतों में फसल लेता है और इसके एवज़ में वह चाहता है कि सरकार की ओर से किए गए वादों के मुताबिक़ उसे कुछ मूलभूत सुविधाएँ मिलें, लेकिन प्रदेश सरकार अपने वादों के ठीक उलट काम कर रही है.

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उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार न तो ठीक से धान ख़रीदती है, न ही पूरा धान ख़रीदती है. प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान ख़रीदी की लिमिट हटाने का वादा राहुल गांधी ने किया था, वह लिमिट भी इस सरकार ने अब तक ख़त्म नहीं की. बारदाने के लिए भी किसानों को यह सरकार तंग करती है, बड़ी कंपनियों को तो बारदाने का ज़्यादा पैसा देती है, पर किसानों को उनके बारदाने का कम पैसा देती है. पंजीयन और अपनी उपज का भुगतान पाने के लिए किसान तक़लीफ़ उठा रहा है. उन्होने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि प्रदेश के पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने धान ख़रीदी का जो बढ़िया सिस्टम बनाया था, कांग्रेस की इस सरकार ने उसे तहस-नहस करके रख दिया है.

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