बागबाहरा. महिला बाल विकास विभाग अधिकारी द्वारा फरमान जारी किए जाने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में दहशत है. महिला बाल विकास विभाग अधिकारी ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे अपने क्षेत्र में सभी घरों में जाकर कुपोषण से मुक्ति संबंधित जानकारी, गर्भवती धात्री महिलाओं को स्तनपान की जानकारी दें, छोटे बच्चों 3 से 6 वर्ष वाले को ऊपरी आहार, साफ-सफाई के संबंध में समझाइश, धात्री माताओं तथा गंभीर कुपोषित बच्चों के घर जाकर आहार पानी संबंधित जानकारी दें. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा है कि वर्तमान में पूरे जिले क्षेत्र में कोरोना का प्रकोप है ऐसी स्थिति में महिला बाल विकास विभाग अधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाने का फरमान जारी करना हास्यास्पद लगता है.
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यदि घर-घर भ्रमण के दौरान कार्यकर्ता ही संक्रमित हो गई तो वे दूसरों को संक्रमित करेंगी. जानकारी मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र की कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खुद भी गर्भवती हैं. उन्हें संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखना होगा। अधिकारी के निर्देश पर कार्ययोजना अनुरूप कार्य करने की जवाबदेही भी है लेकिन ऐसे समय मे खुद गर्भवती कार्यकर्ता कैसे दिशा-निर्देश का पालन करें यह समझ से परे है. महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी का संक्रमण काल में इस तरह के आदेश जारी करना न्याय संगत नहीं है. क्या महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी खुद इस तरह के काम के लिए घर-घर भ्रमण करने में सक्षम हैं? अध्यक्ष चंद्राकर ने कलेक्टर को पत्र लिखकर महिला बाल विकास विभाग के इस तुगलकी फरमान पर रोक लगाने कहा है.
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