रजिंदर खनूजा
पिथौरा. महासमुंद जिले के दूरस्थ विकासखण्ड सरायपाली के ग्राम सिंघोडा का हाईस्कूल एक चपरासी के भरोसे ही चल रहा है. ज्ञात हो कि उक्त स्कूल में पदस्थ एकमात्र शिक्षक की मौत कोरोना से हो गई थी. उसके स्थान पर अब तक किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है. प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते लंबे अंतराल के बाद अब स्कूलों को 2 अगस्त से खोल दिया गया है. लेकिन स्कूलों में शिक्षको की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई आज भी प्रभावित है. सिंघोड़ा हाईस्कूल में पिछले तीन सालों से शिक्षक की कमी है और अब हालात यह है कि स्कूल में पदस्थ एकमात्र शिक्षक की भी कोरोना से मौत के बाद यह स्कूल शिक्षकविहीन हो गया है और अब यह एक चपरासी के भरोसे स्कूल खुल रहा है.
जहां बच्चे शिक्षकविहीन स्कूल में पढ़ाई करने आते तो हैं पर इस स्कूल में पढ़ाई कैसे चल रही होगी यह आसानी से समझ जा सकता है. विगत दो सत्र से बंद स्कूल के बाद अब स्कूल खुला भी तो बगैर शिक्षक. अब ग्रामीण बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, वहीं आला अधिकारी अब संज्ञान लेने की बात करते हुए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कह रहे हैं.
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खाली कमरे, खाली कुर्सियां
उक्त स्कूल को प्रत्यक्ष देखने पर वहां बिना शिक्षक के ही बच्चे बैठे दिखे. स्टाफ रूम की खाली कुर्सियां और तो और प्राचार्य रूम खाली कमरा इस स्कूल की कहानी स्वयं ही बयां कर रहा है. जिले में दम तोड़ती सरकारी शिक्षा व्यवस्था का हाल इस स्कूल से पता चलता है. यहां पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं के 78 बच्चों के भविष्य अधर में हैं. ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी नहीं, पूरा डाटा स्कूल शिक्षा विभाग के पास स्कूल खोले जाने से पहले है.
लेकिन औपचारिक व्यवस्था के बगैर ही 2 अगस्त से स्कूल को खोल दिया गया है. जहां चपरासी स्कूल खोल देता है और बच्चे स्कूल सिर्फ खेलने जाते हैं. इस बात को लेकर बच्चों के परिजन काफी परेशान हैं और कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगा रहे हैं. पालको कहना है कि जब से स्कूल खुला है तब से शिक्षकों का अभाव है. इस बात को लेकर कई बार पालक आंदोलन कर चुके हैं.
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वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी : सहायक संचालक
जिले के सहायक संचालक शिक्षा विभाग सतीश नायर ने उक्त संबंध में बताया कि उनके संज्ञान में ये मामला अभी आया है. उन्होंने इसकी वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीईओ सरायपाली को निर्देश दिए हैं. पर श्री नायर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. उन्होंने इस संबंध में शासन को पत्र लिखने की बात कही पर वे यह स्पष्ट नहीं बता पाए कि यहां पदस्थ शेष 2 शिक्षकों को वापस क्यों नहीं भेजा जा सकता.
बहरहाल, शिक्षा विभाग स्कूल आ पढ़े बर, जिंदगी ल गढ़े बर. कुछ ऐसे ही स्लोगन के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का दंभ भरता है लेकिन यदि स्कूल में शिक्षक ही ना हो तो आखिर इन बच्चों का भविष्य कौन गढ़ेगा. इन सवालों का जवाब शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है. बहरहाल, देखना यह होगा कि अब सिंघोड़ा के बच्चों के भविष्य के लिए शिक्षा विभाग कौन सा फैसला लेता है.







