सौरभ गोयल
सरायपाली. लॉकडाउन के दौरान जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं बावजूद मजदूरों का जत्था घर वापसी के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं. इन प्रवासी मजूदरों को संक्रमण के खतरे के साथ-साथ भूख से भी जूझना पड़ रहा है. गुरूवार शाम सरायपाली से गुजर रहे प्रवासी मजदूरों का जत्था ग्राम बैतारी में कुछ देर के लिए ठहरा तो सरपंच वासुदेव मांझी, सचिव संघ के जिलाध्यक्ष सुनील साहू व मां रूद्रेश्वरी क्रिकेट समिति सहित बैतारी के ग्रामीणों के सहयोग से उन्हें भोजन कराया. पहले जत्थे में शामिल 22 महिला-पुरूष मजदूरी और राजमिस्त्री का कार्य करते हैं वे पैदल ही पश्चिम बंगाल के लिए नागुपर से बीते 4-5 दिन पहले निकले थे. इन बीते दिनों में उन्हें गुरूवार शाम ही यहां भोजन नसीब हुआ.
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मजदूरों ने बताया कि रास्ते में उन्होनें मकान निर्माण के औजार करनी, धमेला, फावड़े आदि वजन पकड़कर पैदल चलने में आ रही दिक्कतों के कारण फेंक दिए. कुछ जगह उन्हें खाने के लिए बिस्किट मिले जिन्हें वे खाकर पैदल चल रहे थे. वहीं दूसरे जत्थे में शामिल साइकिल सवार श्रमिक बुधवार शाम रायपुर से पश्चिम बंगाल के लिए निकले थे जिन्होनें महासमुंद के समीप रात्रि विश्राम मुर्रा खाकर किया. गुरूवार को बैतारी में रात में मिले भोजन के बाद उन्होनें साइकिल से ही आगे की सफर करने की जानकारी दी. उस समूह में 12 साइकिल यात्री थे जिनमें सभी की उम्र 25 से कम ही थी. इनमें शामिल एक मजदूर तुषार ने बताया कि लॉकडाउन के एक महीने में उनके सामने मकान का किराया चुकाने और भूख मिटाने की चिंता ने वापस उन्हें घर लौटने मजबूर कर दिया. वे रायपुर में बोरा सिलाई का काम कर रहे थे. जहां उनके मालिक ने किसी भी प्रकार की सहायता नहीं की. जिसके बाद वे सभी अपने-अपने घरों से बैंक खातों में पैसे मंगवाकर 4-5 हजार में एक-एक साइकिल खरीद कर खाने के लिए मुर्रा और बिस्कुट लिए रायपुर से बंगाल की सफर के लिए निकल पड़े.
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