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शिक्षकों और भवन का अभाव, एक कमरे में लगती हैं 9वीं-10वीं की कक्षाएं

Published on: September 30, 2019
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पारस सांखला

बागबाहरा. गांवों में स्थित सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है. सबसे बुरा हाल वनांचल क्षेत्र का है जहां अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग निवासरत हैं. जानकारी के मुताबिक ग्रामीण अंचल के 43 प्राथमिक शाला एक शिक्षकीय है वहीं दर्जन भर प्राथमिक शाला और 2 हाईस्कूल शिक्षकविहीन हैं. इधर, शहर में अतिशेष शिक्षक हैं जो अपनी मूल पदस्थापना जगह से शहर में जमे हुए हैं. मुनगासेर हायर सेकेंडरी स्कूल में भवन और शिक्षकों का अभाव है. यहां कक्षा नवमीं में करीब 170 और 10वीं में 127 विद्यार्थी हैं जिन्हे एक ही कमरे में पढ़ाई करनी होती है. विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक होने के कारण यहां अलग सेक्शन की आवश्यकता है पर भवन की कमी है. यही स्थिति कमोबेश अधिकांश स्थानों की है.

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ग्रामीण अंचल की स्कूलों में लम्बे समय से शिक्षकों की नियुक्ति न होने से परेशानी बढ़ गई है पूरे ब्लॉक क्षेत्र की स्कूल व्यवस्था शिक्षक के तहत चलाई जा रही है. व्यवस्था का आशय यह है कि दो या तीन शिक्षकीय स्कूल से एक शिक्षक को दूसरे स्कूल में भेजकर स्कूल खोलना प्रमुख कारण है. इस व्यवस्था से दोनों स्कूलों की पढ़ाई चौपट हो रही है. अधिकांश शिक्षण संस्थाओं में पूर्णकालिक प्राचार्य, प्रधानपाठक, प्रधानाध्यापक विद्यालयों में नियुक्ति नहीं की गई है. प्रमुख पद के कर्तव्य भी शिक्षाकर्मी या एलबी शिक्षकों के द्वारा किया जा रहा है. बच्चों के अनुपात में शिक्षक की व्यवस्था कहीं नहीं है. कक्ष और संसाधन का घोर अभाव है. ऐसे में सरकार की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना बेईमानी होगी.

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