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सिख युवक व मुस्लिम युवती की शादी करा पिथौरा ने पेश की मिसाल

Published on: March 15, 2020
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रजिंदर खनूजा

पिथौरा. नगर में एक सिक्ख परिवार एवं एक मुस्लिम परिवार के युवक-युवती के धूमधाम से हुए विवाह ने क्षेत्र के साम्प्रदायिक सौहार्द्र की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है. विवाह समारोह में दोनों परिवारों के सैकड़ों लोगों ने शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया. इस विवाह की सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है. यहां मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ी युवती का विवाह नगर के ही एक सिक्ख परिवार के युवक से हुआ. ये विवाह दोनों परिवारों की आपसी सहमति से हुआ. रविवार को पिथौरा में सामाजिक बंधनों को दरकिनार करते हुए एक मुस्लिम परिवार में पली लाडली सीमा नगर के सिक्ख युवक हरमीत के साथ वैवाहिक बंधन में बंध गई. इसके लिए दोनों परिवार उत्साहित थे. विवाह में सभी नगरवासियों ने पूरी तरह सहयोग किया.

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बेटी के लिए अच्छे वर की तलाश थी : नूरजहां

सीमा की मां नूरजहां खान ने इस प्रतिनिधि के सामने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने सीमा को सात वर्ष की उम्र में दत्तक पुत्री के तौर पर अपनाया था. चूंकि इस बच्ची के धर्म का उस समय पता नहीं था. लिहाजा हिन्दू एवं मुस्लिम धर्म में चलने वाला प्रचलित नाम सीमा ही इसका नाम रखा गया. समय के साथ जब सीमा बड़ी हुई तब उन्हें इसकी शादी की चिंता हुई. इस बीच वे स्वयं मुम्बई में ही बस गई. वहां भी नूरजहां ने सीमा को अपने साथ रखा और उसके लिए कोई अच्छा लड़का तलाश जारी रखी.

करीब दो साल के बाद पिथौरा के उनके एक परिचित ने उन्हें फोन पर पिथौरा के गुरुदयाल सिंह सलूजा परिवार के एक दिव्यांग युवक हरमीत सिंह सलूजा के बारे में जानकारी दी. जानकारी मिलते ही नूरजहां स्वयं पिथौरा आई और लड़के का काम व आदत-व्यवहार देखकर उससे सीमा को मिलवाया. सीमा एवं हरमीत ने एक-दूसरे से बात की और दोनों के बीच शादी के लिए सहमति बन गई. इसके बाद नूरजहां ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी और तिथि तय कर शादी भी कर दी. इस शादी में ना किसी ने उन्हें मना किया और ना ही किसी ने कोई आपत्ति ही की. सीमा की माँ नूरजहां ने बताया कि अब शादी के बाद वर-वधू जिस धर्म को मानना चाहें, इसके लिए वे स्वतंत्र हैं.

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धर्म कोई भी हो इंसान तो है : सुरेंद्र

दूसरी ओर हरमीत के चाचा सुरेंद्र सिंह सलूजा ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उनके परिवार ने इस शादी में धर्म को दरकिनार कर इंसानियत को महत्व दिया. इस विवाह में सिक्ख समाज का भरपूर सहयोग मिला है.

सिक्ख रीति-रिवाज से हुई शादी

हरमीत एवं सीमा की शादी सिक्ख समाज के रीति-रिवाज से सम्पन्न हुई. स्थानीय गुरुद्वारा में चार फेरों के साथ वे वैवाहिक बन्धन में बंध गए. कार्यक्रम में सिक्ख, मुस्लिम सहित अन्य धर्म के सैकड़ों लोगों ने भी पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रहकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया.

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