रायपुर/महासमुंद. छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति रायपुर के अध्यक्ष, पूर्व विधायक/छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष विरेंद्र पाण्डेय ने मुख्य सचिव और सचिव छत्तीसगढ़ शासन राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय को ज्ञापन प्रस्तुत कर महासमुंद कलेक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर को निलंबित कर विभागीय जांच कार्रवाई संस्थित करने की मांग की है. उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि महासमुंद के खसरा नम्बर 1958 रकबा 5.690 हेक्टेयर तहसील कार्यालय के लिए सुरक्षित शासकीय आबादी भूमि पर नपा द्वारा अतिक्रमण कर दुकान निर्माण कराया जा रहा है. प्रश्नाधीन भूमि का धारणाधिकार कार्यालय तहसील महासमुंद का है.
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उक्त भूमि पर निर्माण कराए जाने से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में शासकीय और निजी कार्यक्रमों का वाहन पार्किंग, तहसील कार्यालय और शुलभ शौचालय पहुंच मार्ग आवागमन, शासकीय आवासों के निवासियों की निजता, शांति का वातावरण, अधिवक्ताओं और शासकीय सेवकों का आम निस्तार प्रभावित होगा. ज्ञापन में नपा के सहायक अभियंता से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त भूमि पर दुकान निर्माण की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति नहीं है. समिति व नगर के नागरिकों ने कलेक्टर के समक्ष 19 जनवरी को ज्ञापन प्रस्तुत कर भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के प्रावधानानुसार तहसील महासमुंद के लिए सुरक्षित भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने और तहसीलदार महासमुंद को धारा 248 के अंतर्गत बेदखल करने ज्ञापन सौंपा जा चुका है.
इसी प्रकार किसान मजदूर संघ रायपुर के संयोजक ललित चन्द्रनाहू ने 18 जनवरी को ज्ञापन प्रस्तुत किया है. समिति के जिलाध्यक्ष पंकज साहू ने न्यायालय तहसीलदार महासमुंद के समक्ष 20 जनवरी को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर संहिता की धारा 52 (2) के अंतर्गत निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश की मांग की थी, पर पीठासीन अधिकारी/तहसीलदार प्रेमूलाल साहू द्वारा अतिक्रमण प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया गया और स्थगन आवेदन पर विचार नहीं किया गया. जिसकी शिकायत 27 जनवरी को कलेक्टर निलेश कुमार क्षीरसागर के समक्ष की गई, पर उनके द्वारा तहसील कार्यालय की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश न कर अतिक्रमण को प्रोत्साहित किया गया.
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