रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीत सत्र के दूसरे दिन धर्मांतरण के मुद्दे पर जमकर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गई. नारायणपुर की घटना को लेकर भाजपा सदस्यों ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए वेल पर आकर नारेबाजी करने लगे. जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया. इससे पहले प्रश्नकाल में पक्ष-विपक्ष के नेताओं के बीच सवाल-जवाब हुए. सबसे पहले सदन के माहौल की गर्मी 33 करोड़ के फंड के गलत उपयोग के आरोपों ने बढ़ा दीं. भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि DMF 33 करोड़ रुपए से रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जाने थे, इसमें उन्होंने राशि के गलत उपयोग का आरोप लगाया. जवाब में मंत्री उमेश पटेल ने बताया कि 3 साल में 33 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.
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भाजपा की ओर से कहा गया कि जांजगीर जिले में प्रशिक्षण पर रुपए खर्च नहीं किए गए. बाद भाजपा के विधायकों, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर समेत अन्य ने मिलकर हंगामा शुरू कर दिया. इस पर मंत्री उमेश पटेल को विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने जांच कराने के निर्देश दिए. दूसरा बड़ा मुद्दा शराब का था. खुद कांग्रेस की ही विधायक छन्नी साहू ने अपनी ही सरकर के आबकारी मंत्री कवासी लखमा को घेरा. छन्नी ने मंत्री कवासी से पूछा कि ये बताइए कि 1 बाइक पर तीन लोग हों और उसमें 10 पेटी शराब लाई जा सकती है क्या. जवाब में मंत्री ने कहा कि उसको देख लेंगे, छन्नी ने दोहराया कि 10 पेटी शराब एक बाइक पर आएगी क्या. लखमा ने कहा कि एक बाइक पर तीन पेटी आ सकती है.
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