रायपुर. भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने एक बार फिर किसानों की परेशानी को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा है. चंद्राकर ने कहा कि स्थिति यह है कि स्वयं मुख्यमंत्री के जिले के किसान भी धान रकबे में कटौती और नित-नए नियमों से त्रस्त हो चले हैं. उन्होने कहा कि धान खरीदी की प्रक्रिया को जटिल बना कर प्रदेश सरकार ने किसानों को खून के आंसू रुला दिया है. किसान एक तो नियमों और रकबा कटौती की मार से त्रस्त है, वहीं दूसरी ओर मौसम की मार झेल रहे हैं. विपरीत हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार को धान खरीदी की समय-सीमा को एक माह बढ़ाना चाहिए, क्योंकि लाखों मीट्रिक टन धान खरीदी केंद्रों में जाम होने के कारण भी किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है. सरकार ने अब तक धान मिलिंग की कोई व्यवस्था तक नहीं की है.
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अब किसान टोकन कटने के बाद भी अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं और रोज खरीदी केंद्र से वापस अपना धान लेकर निराश लौट रहे हैं. रोज-रोज धान लाने-ले जाने के कारण किसानों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक तौर पर जो परेशानी हो रही है, वह पीड़ा मौजूदा कांग्रेस सरकार महसूस नहीं कर रही है. वादाखिलाफी के कलंक से लिपी-पुती प्रदेश सरकार किसानों का पूरा धान 25 सौ रुपए की दर में खरीदने से बचने की नापाक साजिश रच रही है जिसे प्रदेश के किसान अब बखूबी समझ चुके हैं और अब वे प्रदेश सरकार और नौकरशाही की मनमानी के खिलाफ सड़क की लड़ाई पर उतरने को विवश हो रहे हैं. चन्द्राकर ने कहा कि जिन ऋण पुस्तिकाओं के आधार पर किसानों का पंजीकरण हुआ है, उसे नकार कर सरकार ने जिस तरह रकबे में हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की कटौती की है वह इस प्रदेश सरकार की बदनीयती की जीती-जागती मिसाल है, और अब भाजपा किसानों के हक के लिए सड़क की लड़ाई लड़कर किसानों के साथ हो रहे अन्याय का मुखर विरोध कर रही है. पार्टी और किसान मोर्चा के कार्यकर्ता पूरी ताकत से किसानों की आवाज उठा रहे हैं और धान खरीदी में आने वाली तमाम दिक्कतों के समाधान के लिए सरकार पर हरसंभव दबाव बना रहे हैं.
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