महासमुंद. भारतीय जनता पार्टी की जिलाध्यक्ष व पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने महासमुंद जिले के सरायपाली विधानसभा क्षेत्र में सहकारी समितियों के अध्यक्ष पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आहूत बैठक में कांग्रेस विधायक किस्मतलाल नंद पर लेन-देन कर मनमाने ढंग से अध्यक्षों को नियुक्त कराने के लगे आरोपों को बेहद शर्मनाक और कांग्रेस की राजनीतिक चरित्रहीनता का जीता-जागता प्रमाण बताया है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था, सहकारिता और लोकतंत्र का ढोल पीटने वाली कांग्रेस की प्रदेश सरकार कांग्रेस के लोगों को पदों की रेवड़ी बांटकर पंचायती राज व लोकतंत्र के साथ-साथ अब सहकारिता आंदोलन को नष्ट-भ्रष्ट करने पर आमादा है.
श्रीमती चौधरी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस में व्याप्त असंतोष को दबाने के लिए कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर सहकारिता आंदोलन को खत्म कर रहे हैं. एक तरफ केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए सहकारिता मंत्रालय बनाया है तो दूसरी तरफ प्रदेश की भूपेश सरकार सहकारी समितियों का औचित्य ही दाँव पर लगा रही है. सहकारी समितियों में नियम विरुद्ध प्रशासकों की नियुक्ति से सहकारिता आंदोलन दम तोड़ रहा है. उन्होंने कहा कि सोसाइटियों को उनके कमीशन का पूरा पैसा नहीं मिलने के कारण समितियां अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रही हैं और वहां के प्रबंधक व कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. सरकार ने इसका समाधान निकालने के बजाय उल्टे सदस्यों का मताधिकार छीनकर वहां अध्यक्ष बैठा दिए हैं.
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श्रीमती चौधरी ने सवाल उठाया कि सन् 2021-2022 में की गई धान खरीदी के कमीशन की राशि सहकारी कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी के चलते जारी कर दी गई, पर 2020-21 की सोसाइटियों के कमीशन की 40 प्रतिशत बकाया राशि अभी तक जारी क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि प्रदेश में सीएम की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है, सीएम मतलब कलेक्शन मास्टर! हाल ही कांग्रेस कमेटी के महामंत्री का एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह सहकरी समितियों में मनोनयन के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे थे. इस ऑडियो से यह साफ हो जाता है कि पूरे प्रदेश में ‘कलेक्शन मास्टर’ ने विधायकों, कांग्रेस के पदाधिकारियों और गुर्गों को बतौर कलेक्शन एजेंट हर जगह बिठा रखा है, जो सहकारी समितियों में नियुक्ति के एवज में मोटी रकम वसूल रहे हैं.
अपने खिलाफ कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं में उपजे आक्रोश के मद्देनजर सरायपाली के विधायक नंद को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे कांग्रेस के विधायक बनकर काम करना पसंद करेंगे या कलेक्शन मास्टर के कठपुतली कलेक्शन एजेंट बनकर? श्रीमती चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार सहकारिता को नष्ट करने पर तुली हुई है. सहकारी समितियों के कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद भी निर्वाचन नहीं कराया जाना लोकतंत्र पर कुठाराघात है. जब से कांग्रेस सरकार अस्तित्व में आई है, लगातार सहकारिता को समाप्त करने का षड्यंत्र रच रही है. जुलाई 2019 को पुनर्गठन के नाम पर असंवैधानिक तरीके से पूरे प्रदेश की 1333 सोसाइटियों को भंग कर दिया गया था.
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उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 22 नवंबर, 2019 के परिणामस्वरूप सभी सोसाइटियों के बोर्ड को पुनः बहाल किया गया. इस प्रकार लगभग चार माह तक अवैधानिक रूप से सोसाइटी के बोर्ड को भंग कर प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई थी जो नियम विरुद्ध है. उन्होंने मांग की कि सोसाइटी के बोर्ड को पुनः बहाल किया जाए एवं पुनर्गठन के बाद 2020 में अस्तित्व में आई 725 नई सोसाइटियां, जिनका 2 वर्ष से ज्यादा कार्यकाल बीतने के बाद भी आज तक निर्वाचन नहीं कराया गया, उनका निर्वाचन कराया जाए.
श्रीमती चौधरी ने कहा कि सहकारी समितियों का कार्यकाल मई-जून में समाप्त हो गया है लेकिन इनके चुनाव के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है. प्रदेश की कांग्रेस सरकार राजनीतिक कार्यकर्ताओं का मनोनयन कर रही है और उसके लिए अवैध रूप से वसूली भी की जा रही है. नियम विरुद्ध जाकर सहकारी समितियों का पुनर्गठन किया है. यह सरकार सहकारी समितियों में चुनाव करवाने से भाग रही है और अपने लोगों को मनोनीत करके उपकृत करने का काम कर रही है. इसके कारण प्रदेश की सोसाइटी के सदस्यों में प्रदेश सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है. इसका परिणाम आने वाले चुनाव में अवश्य दिखेगा.
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