शिवरीनारायण. सिक्खों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के करीब 517 साल पूर्व अमरकंटक से जगन्नाथपुरी यात्रा के दौरान नानकसागर में दो दिन रुकने और वहां के निवासियों सहित तत्कालीन राजा को उपदेश देने के प्रमाण मिलने के बाद अब गुरु नानक देव के शिवरीनारायण में रुकने के प्रमाण भी सामने आए हैं. यहां गुरु की जमीन पर आज भी बंजारा समाज के लोगों द्वारा गुरु नानक जी की मूर्ति स्थापित कर शुभ कार्यों की शुरुआत यहीं से करने की जानकारी मिली है. उक्त संबंध में विगत दिनों रायपुर के रिंकू ओबेरॉय के नेतृत्व में रायपुर तेलीबांधा के बाबा बुद्धासिंघ गुरुद्वारा के प्रधान हरकिशन सिंह राजपूत, राज किशोर तेजवानी और गढ़फुलझर के जसपाल सिंह शिवरीनारायण पहुंचे.
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वहां सिक्ख समाज के भूपेंदर सिंह गांधी, प्रितपाल सिंह गांधी, शिवरीनारायण से रंजीत सिंह गांधी और कुलजीत सिंह गांधी सहित बंजारा समाज के प्रदेश अध्यक्ष (ओड़िशा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश) एवं भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश समन्वयक भागवत नायक, घांसीराम नायक, डॉ. पंचराम नायक, मोहन नायक, खोरबाहरा नायक के साथ गुरु नानक देव जी के मंदिर पहुंचे. यहां पर गुरुनानक देव जी 517 साल पहले अपनी पहली उदासी (1506 ई) में अमरकंटक कबीर चबूतरा से शिवरीनारायण होते हुए गढ़फुलझर (नानकसागर छत्तीसगढ़) होते हुए जगन्नाथपुरी गए थे.
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यात्रा में नानक देव के साथ था बंजारा समाज का काफिला
शिवरीनारायण से बंजारा समाज का काफिला श्री गुरु नानक देव जी के साथ जगन्नाथ पुरी की यात्रा में गए थे. उस समय से बंजारों के पूर्वजों द्वारा शिवरीनारायण (छत्तीसगढ़) में 5 जगह गुरु नानक देव जी के नाम से जमीनें ली गई थी और राम-जानकी गुरु नानक मंदिर में गुरु नानक देव जी की मूर्ति की स्थापना की गई थी. ये निशानियां आज भी मौजूद हैं. जिनके दर्शन करते हुए सिक्ख समाज में मूर्ति पूजा वर्जित होते हुए भी बंजारा समाज की गुरु नानक देव जी के प्रति आस्था को देखते हुए उक्त टीम ने गुरु नानक देव जी की प्रतिमा की चोला साहिब बदलने की सेवा की (जैसे करतारपुर पाकिस्तान) साहिब में गुरु नानक देव जी की समाधि में चादर चढ़ाने की सेवा की जाती है.







