खरसिया. एक समय था जब खरसिया क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को सीजेरियन प्रसव के लिए आनन-फानन में रायगढ़ लाया जाता था और फिर यहां उनका प्रसव कराया जाता था लेकिन अब स्थिति बदल गई है. यहां के सिविल अस्पताल में अब सफलतापूर्वक सी-सेक्सन यानि सीजेरियन प्रसव के द्वारा बच्चे जन्म ले रहे हैं. सामान्य और सी-सेक्शन मिलाकर औसतन लगभग 120 बच्चे प्रतिमाह यहां जन्म ले रहे हैं. बमुश्किल यहां से 1-2 केस महीने भर में रायगढ़ या अन्यत्र रेफर हो रहे हैं. रेफर होने में ज्यादातर मामले एनिमिक गर्भवती महिलाओं के हैं जिस पर भी अंकुश लग जाएगा क्योंकि यहां शीघ्र ही ब्लड बैंक खुल जाएगा. इसके साथ ही पैथोलॉजी लैब जहां हर प्रकार के खून जांच की सुविधा होगी उसके लिए भी तैयारियां शुरू हो चुकी है.
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स्थानीय विधायक और मंत्री उमेश पटेल, कलेक्टर भीम सिंह के मार्गदर्शन और सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी के निर्देश पर सिविल अस्पताल में यह परिवर्तन आया है. ओपीडी में गर्भवती महिलाओं की भीड़ और सभी का बराबर परामर्श इसे स्पष्ट करता है. यहां पदस्थ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रवाल के अथक मेहनत ने खरसिया क्षेत्र को अब शिशुओं के जन्म के लिए मुफीद स्थल बना दिया है. उन्होंने बरगढ़ जैसे शहर को छोड़कर खरसिया में अपनी सेवा देना बेहतर समझा. सिविल अस्पताल के स्टाफ ही बताते हैं कि वह माह में एक बार अपनी पत्नी और बच्चे से मिलने बरगढ़ जाते हैं कई दफे इमरजेंसी की हालत में वह आधे रास्ते से लौट आए हैं और यहां सुरक्षित प्रसव कराए हैं. फिर वह अपना दौरा बाद के लिए टाल देते हैं. सेत कुमार बताते हैं कि उनकी पत्नी को जब प्रसव पीड़ा हुई तो वे उसे सिविल अस्पताल लेकर गए. वहां पहुंचने पर पता चला कि डॉक्टर अस्पताल में नहीं है. वह बाहर गए हैं किन्तु नर्स ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आप इन्हें यहां भर्ती कराइए सब ठीक हो जाएगा. कुछ देर बाद डॉक्टर अग्रवाल वहां आ गए और उन्होंने ही प्रसव कराया. अभी जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.
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स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय अग्रवाल (एमएस, गायनिक) कहते हैं कि खरसिया जैसी जगहों में पहले प्रसव पीड़ा या उससे कुछ समय पहले तकलीफ होने पर ही गर्भवती महिलाएं स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास आती थीं लेकिन अब समय बदल चुका है. गर्भधारण के बाद से ही ज्यादातर महिलाएं बिना झिझक डॉक्टरी परामर्श लेना शुरू कर चुकी हैं. आयरन, फोलिक एसिड की गोली के सेवन जैसी जरूरतों के लिए वह सजग हो चुकी हैं. लेकिन अभी भी जागरुकता की आवश्यकता है क्योंकि पुरुष गायनकोलॉजिस्ट से सलाह व जांच कराने में कई महिलाएं कतराती हैं और यहां भी महिला डॉक्टर खोजती हैं. इसी चक्कर में कई महिलाएं अस्पताल नहीं आती और तकलीफ बढ़ जाती है तब मजबूरी में उन्हें आना ही पड़ता है. उन्हें यह समझना चाहिए कि एक सर्जन-विशेषज्ञ उन्हें बेहतर सलाह दे सकता है.
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समय पर जांच बहुत जरूरी
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान यदि ग्लूकोज का स्तर शरीर में ठीक नहीं होता तो इसकी वजह से बच्चे को जन्म से होने वाली विकृति, शरीर विकास में बाधा आदि हो सकती है. वहीं महिलाओं में आने वाले समय से पूर्ण रूप से मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है. इसके उपचार के लिए संतुलित आहार प्रोटीन में आयरन से भरपूर आहार एवं टुकड़ों में भोजन करना चाहिए. गर्भवतियों को अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होना देना चाहिए इसलिए वह पानी और सुरक्षित पेय पदार्थों का सेवन करें. गर्मी में थकान जल्दी होती है इसलिए गर्भवतियों को ब्रेक ले-लेकर आराम करना चाहिए.
हो रहा बेहतर इलाज : सीएमएचओ
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने बताया कि खरसिया सिविल अस्पताल में लोगों को बेहतर इलाज मिल रहा है. खासकर संस्थागत प्रसव के सीजेरियन केसेस अब वहां सफलतापूर्वक हो रहे हैं. जिला मुख्यालय पर अब उनकी निर्भरता कम होती जा रही है. मातृत्व सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम है. हमर लैब और ब्लड बैंक सिविल अस्पताल में शीघ्र खुल जाएंगे. जिससे लोगों को और भी ज्यादा सुविधा वहां मिलेगी.







