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सुपर कम्पोस्ट खाद के नाम पर सूखा गोबर लेने किसानों को बाध्य न करें : स्मिता

Published on: April 28, 2022
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बागबाहरा. खरीफ सीजन 2022-23 की तैयारी में किसान जुट गए हैं. वे खेतों में गोबर खाद डालकर खेतों की सफाई एवं जोताई कर रहे हैं. साथ ही समितियों में ऋण और खाद-बीज लेने पहुंच रहे हैं. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चंद्राकर ने कहा कि कर्ज लेने वाले किसानों के लिए छत्तीसगढ़ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित रायपुर ने 13 अप्रैल 2022 और जिला नोडल अधिकारी कार्यालय महासमुंद से 19 अप्रैल 2022 को सभी समितियों में पत्र भेजकर नया फरमान जारी किया है. आदेश के अनुसार ऋण लेने वाले किसानों को वर्मी कंपोस्ट खाद (सूखा गोबर) गौठान से प्रति एकड़ एक क्विंटल उठाया जाना अनिवार्य किया गया है. ऐसे में जो किसान कंपोस्ट खाद नहीं लेगा उसका कर्ज ही स्वीकृत नहीं होगा.

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इस आदेश से क्षेत्र के किसानों में आक्रोश है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गौठान में 2 रुपए किलो में गोबर खरीदी की गई है. उक्त गोबर को बिना वर्मी कंपोस्ट खाद बनाए गौठान में ही बोरी में भरकर रखा गया है. उक्त गुणवत्ताहीन गोबर को जिसे सुपर कंपोस्ट खाद के नाम से प्रति क्विंटल एक हजार रुपए में किसानों को लेने बाध्य किया जा रहा है यह कतई उचित नहीं है. वह वर्मी कंपोस्ट तो दूर, गोबर खाद भी नहीं है. उन्होंने कहा कि जैविक वर्मी कंपोस्ट समिति के माध्यम से खरीदना अनिवार्य किया गया है, यह सही नहीं है. इसे स्वैच्छिक किया जाना चाहिए. श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि सरकार की बाध्यकारी नीति कतई मंजूर नहीं है. यदि वास्तव में वह खाद जैविक वर्मी कंपोस्ट होता तो हम सरकार के इस निर्णय का स्वागत और समर्थन करते पर गौठान में महीनों से खुले में पड़े मिलावटी एवं गुणवत्ताहीन गोबर जिसे बारिक कर ढेर लगाया है या बोरी में भरकर रखा है उक्त गोबर को किसानों को खरीदने बाध्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऋणी किसानों को कृषि ऋण में सुपर कंपोस्ट खाद खरीदना अनिवार्य किए जाने का पत्र समितियों में पहुंच चुका है.

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ऋण लेने पहुंच रहे किसानों को उक्ताशय की जानकारी प्रबंधक द्वारा दी जा रही है. नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीण सहकारी समिति के कर्मचारियों ने बताया कि उच्चस्तरीय अधिकारियों का दबाव है. यदि हम किसानों को सूखा गोबर का परमिट जारी नहीं करेंगे तो हमारे खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस स्थिति में हम अधिकारियों के निर्देश का पालन करने बाध्य हैं. श्रीमती चंद्राकर ने कहा कि सूखा गोबर खाद लेने की बाध्यता शासन-प्रशासन वापस लें. यदि किसानों को गोबर खरीदने पर ही ऋण देने का प्रावधान बनाया गया है तो हम इसका कड़ा विरोध कर किसानों के साथ सड़क की लड़ाई लड़ने विवश होंगी. इस निर्देश के खिलाफ किसान संगठन के नेताओं एवं किसानों के साथ जल्द बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाएंगे.

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