पारस सांखला
बागबाहरा. बजट में बागबाहरा क्षेत्र के साथ फिर एक बार सौतेला व्यवहार किया गया है. आजादी को दशकों बीत गए पर खल्लारी क्षेत्र के छुईहा-फिरगी नाले में पुल और सड़क नहीं बन पाया. लगता है सरकार और यहां के जनप्रतिनिधि किसी हादसे के बाद पुल निर्माण की स्वीकृति देंगे. लोकसभा, विधानसभा चुनावों से पहले नाला पर पुल बनाने का आश्वासन सभी दल के नेता देते रहे हैं. बावजूद पुल निर्माण के लिए स्वीकृति नहीं दिला पाए. ग्रामीण अभी भी जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं. खासकर बरसात के दिनों में लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है. ग्रामीणों की उम्मीदों को यहां के जनप्रतिनिधि पूरा नहीं कर पा रहे हैं और ना ही जिला प्रशासन इस मसले को गंभीरता से ले रहा है. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों में निराशा है. ग्रामीणों को खुश करने पुल निर्माण करने बजट में शामिल तो करा दिया जाता है.
लेकिन कार्य प्रारंभ करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दिलाने में यहां के नेता बौने साबित हो रहे हैं. पुल बनाने नाबार्ड से स्वीकृति दिलाने लोक निर्माण विभाग ने बकायदा प्राक्कलन तैयार कर भेजा था पर प्राक्कलन नाबार्ड से वापस आ गया है. प्राक्कलन वापस क्यों आया इसे जानने समझने की भी कोशिश क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ने नहीं की. वहीं क्षेत्र के सालडबरी नाला पर चारभांठा जलाशय निर्माण करने की स्वीकृति तत्कालीन रमन सरकार ने दी थी. जलाशय बनाने ठेका भी दिया जा चुका था. किसानों की जमीन अधिग्रहण करने सरकार ने मुआवजा राशि कलेक्टर के खाते में भी जमा करा दी है. प्रभावित किसानों की सुनवाई भी की जा चुकी है पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शासन को गलत जानकारी देकर जलाशय निर्माण पर रोक लगवा दी. उक्त जलाशय निर्माण के बारे में क्षेत्रीय विधायक को भी डेढ़ -दो साल पहले अवगत कराया जा चुका है. बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया गया. इस क्षेत्र में सिंचाई का एक भी साधन नहीं है. आजादी के बाद पहली बार तत्कालीन भाजपा सरकार ने किसानों की मांग पर जलाशय निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान कर किसानों को तोहफा दिया था. पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के पंगुता के चलते यह योजना अधर में लटक गई है.
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इसी प्रकार 2017 से ग्राम पंचायत छुईहा में नवीन हाईस्कूल प्रारंभ किया गया है पर अब तक यहां भवन निर्माण करने राज्य शासन ने स्वीकृति प्रदान नहीं की है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधि भवन निर्माण करने की स्वीकृति दिला पा रहे हैं. इसी प्रकार क्षेत्र के अनेक कीचड़ भरे सड़क को पक्का डामरीकरण करने की मांग क्षेत्र के नागरिकों द्वारा की जाती रही बावजूद एक भी सड़क मार्ग को पक्का करने स्वीकृति नहीं मिली. कोचर्रा से सेनभांठा सालडबरी मार्ग, नरतोरी से तुपकबोरा मार्ग, तुपकबोरा से छुईहा मार्ग, सोहागपुर से बोड़रीदादर मार्ग, देवरी से खुर्सीपार मार्ग, चंदरपुर से करीडीह मार्ग, खैरट मार्ग से मोखा-चिंगारियां मार्ग, टेढ़ीनारा से भिलाईदादर मार्ग, बागबाहरा कॉलेज से सिर्रीपठारीमुड़ा-आमगांव आदि दर्जनों मार्ग हैं जिसे डामरीकृत की जानी है बावजूद जानबूझ कर उपेक्षित किया जा रहा है. इस क्षेत्र को ऐसा कोई जनप्रतिनिधि नहीं मिला जो ग्रामीणों की बुनियादी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करा सकें.







