महासमुंद. संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में आयोजित मातर उत्सव में शामिल हुए. इस दौरान श्री चंद्राकर, यादव समाज की टोली के साथ झूमते नजर आए। ग्राम अछरीडीह, परसाडीह, पासीद, सुकुलबाय, केडियाडीह व परसकोल में मातर उत्सव का आयोजन किया गया. जिसमें संसदीय सचिव व विधायक श्री चंद्राकर शामिल हुए. मातर उत्सव के उत्साह को देखकर वे भी झूमने से अपने आपको रोक नहीं पाए. छत्तीसगढ़ राज्य गठन के विगत वर्षों में यहां की विलुप्त होने जा रही परम्पराओं एवं उत्सव को पुनर्जीवित करने का कार्य वर्तमान सरकार कर रही है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में छत्तीसगढ़ियों की सरकार पूर्वजों की परम्परा और यहां की पुरातन संस्कृति को पुनर्जीवित कर आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है.
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आज हरेली से लेकर दीवाली तक यहां के लोग अपने पुरातन संस्कृति के अनुसार परम्परागत ढ़ग से त्यौहार मना रहे हैं. श्री चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में छत्तीसगढ़ीया व किसान के बेटा मुख्यमंत्री बने हैं, तब से श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को संरक्षित किया है. छ्ग की प्राचीन कला और संस्कृति छत्तीसगढ़ की अनमोल धरोहर है. राज्य सरकार छ्ग की प्राचीनतम परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को सहेजते हुए उनके विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है. छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने हरेली, तीज, कर्मा जयंती आदिवासी दिवस और छठ पूजा को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है. छत्तीसगढ़ में हरेली, तीजा और कर्मा जंयती को परंपरागत रूप से मनाया जाता है लेकिन इन त्योहारों में पहले सार्वजनिक अवकाश नहीं था. तीज त्योहारों में माताओं को अवकाश था लेकिन उनके बच्चों के स्कूल बंद नहीं होते थे. उनके भाई या पति को अवकाश नहीं होता था कि वे उन्हें मायके तक छोड़े आएं. इधर के बरसों में शहरों में तीजा की परंपरा विस्मृत होती जा रही थी. अवकाश नहीं मिलता था तो बेटियां भी घर में पूजा कर लेती थीं. शासन के इस निर्णय से उल्लास का माहौल है.
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मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के हर कोने के गांव-गांव में गौठान बनाए गए हैं. गौठान में गायों को रखने के साथ ही चारा, पानी एवं छांव की व्यवस्था की गई है. नरवा के कार्य भी किए जा रहे हैं. जल सरंक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप नरवा का विकास करना है. नरवा से खेती के लिए पानी का स्रोत अच्छा रहेगा. हमारा प्रदेश देश में पहला ऐसा राज्य है, जहां गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपए की राशि में गोबर क्रय किया जा रहा है. हमारी परंपरा और संस्कृति में गौरा-गौरी के रूप में गोबर की पूजा की जाती है तथा गोवर्धन पूजा में गोबर का टीका लगाया जाता है. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला पंचायत सदस्य अमर चंद्राकर, अरूण चंद्राकर, थनवार यादव, गोविंद साहू, निहाल सोनकर, आकाश निषाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद थे.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) November 8, 2021







