रजिंदर खनूजा
पिथौरा. महासमुंद जिले में जंगली हाथियों की लगातार चहलकदमी ने क्षेत्र के ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है. हाथी लगातार सिरपुर से महासमुंद के बीच के जंगल एवं गांवों में विचरण कर रहे हैं. हाथियों की इस चहलकदमी को रोकने वन विभाग अब तक असफल साबित हुआ है. विगत 5 वर्षों से जिले के लगभग सभी क्षेत्रों का भ्रभण कर हाथी अपना कॉरिडोर बना चुके हैं. इनके सामने आने वाले कोई दो दर्जन ग्रामीण भी इनकी चपेट में आकर मारे जा चुके हैं.
बावजूद वन विभाग के उच्च अधिकारी मात्र इधर से उधर खदेड़ने या कुछ हास्यास्पद उपाय करने को छोड़कर अन्य कोई सार्थक उपाय नहीं कर पाए हैं. जिससे हर पल ग्रामीणों की जान सांसत में रहती है. ज्ञात हो कि शनिवार को भी दो हाथी जिले के कोडार डिपो के पीछे कक्ष क्रमांक 20 में विचरण कर रहे हैं. जिसके कारण क्षेत्र के कोडार, कौआझर, बंजारी, लोहारडीह आदि गांवों में अलर्ट जारी किया गया है.
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शासन का हाथी प्रोजेक्ट असफल
जिले में हाथियों की गतिविधियों को देखने से लगता है कि शासन द्वारा घोषित एलिफेंट प्रोजेक्ट मात्र घोषणा में ही रह गया है क्योंकि अभी भी वन विभाग एवं प्रशासन मात्र हाथियों को इधर से उधर खदेड़ने का काम ही कर रहा है. इसके अलावा हताहत ग्रामीणों को तत्काल मुआवजा देने का काम भी विभाग बखूबी कर रहा है. पर अब तक यह पता नहीं चल रहा है कि आखिर हाथियों की समस्या का समाधान कब तक और कैसे हो सकेगा. ऐसा लगता है शासन के पास मानव हाथी द्वंद रोकने के कोई सार्थक उपाय ही नहीं है और ना ही कोई रणनीति. लिहाजा अब एक क्षेत्र ही नहीं पूरे प्रदेश की जनता को हाथियों के आतंक के भरोसे छोड़ दिया गया है.







