पिथौरा. क्षेत्र में हुई अल्पवर्षा से अब खेत दरकने लगे हैं. पानी की कमी से करीब 40 फीसदी रोपाई अटकी हुई है वहीं जिन किसानों ने बोआई और रोपाई की है उनके खेत भी अब पूरी तरह सूख चुके हैं. जिससे इस वर्ष अकाल का साया मंडराता दिखने लगा है. विगत कुछ वर्षों से खरीफ की बम्पर पैदावार के बाद इस वर्ष अब के हालात सूखा अकाल के दिखाई देने लगे हैं. विगत पखवाड़े भर से बारिश न होने के कारण अब खेत भी दरकने लगे हैं. किसान अपनी बचत का एक हिस्सा अब तक कि जुताई एवं बुआई में खर्च कर चुके हैं. किसान अब बड़ी बेसब्री से आसमान की ओर ताक रहे हैं कि अब बारिश हो जाए और उनकी फसल बच जाए.
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स्थानीय कृषि अधिकारी डीपी पटेल ने बताया कि इस वर्ष विगत वर्ष हुई 428 मिमी वर्षा के मुकाबले इस वर्ष मात्र 335 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है. कुल 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बोआई की जानी थी पर 44500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बोआई सम्पन्न हुई है. जिसमें भी असिंचित खेतों की फसल पानी की कमी के कारण सूखने की कगार पर है. रोपाई 10 हजार हेक्टेयर में करीब 6800 हेक्टेयर ही पूर्ण हो पाई है. इसके अलावा दलहन की बोआई भी लक्ष्य से आधे से भी कम क्षेत्र में पूर्ण हुई है. श्री पटेल ने बताया कि इस वर्ष करीब सभी ग्राम पंचायतों में गोबर ख़रीदी एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद की बिक्री की जा रही है. कम्पोस्ट खाद अब किसानों की पसंद बनती जा रही है जिसके कारण इसकी बिक्री भी अधिक हो रही है.
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