गाहे-बगाहे : – ललित मानिकपुरी
लोग हास्य-विनोद में कहने लगे हैं कि ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ वाले रेत का तेल निकालने में लगे हैं. आशय स्पष्ट है. रेत में तो तेल होता नहीं, निकलेगा कहां से? असंभव है. यानी चाहे जितनी खबर छाप लीजिए परिणाम शून्य रहेगा. काफी हद तक यह सच भी जान पड़ता है. ऐसा लगता है कि प्रशासन को फ़र्क नहीं पड़ता. प्रशासन के इसी रवैये पर महासमुंद के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और तीन बार विधायक रह चुके अग्नि चन्द्राकर को भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह कहना पड़ा कि महासमुंद जिले के अधिकारी जानबूझकर कांग्रेस सरकार को बदनाम करने पर तुले हुए हैं. इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. माफियाओं से अफसरों की सांठगांठ जाहिर हो चुकी है. जनता में अग्नि चन्द्राकर की छवि कैसी है यह बताने की जरूरत नहीं. वे और नेताओं की तरह खबरों में बने रहने के लिए बेवजह बयानबाजी भी नहीं करते.
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प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के ढाई साल बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से पत्र लिखकर जिले के अधिकारियों के प्रति जो नाराजगी जताई है, उससे विषय की गंभीरता को समझा जा सकता है. ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ तो पहले से ही कहते आ रहा है कि सवाल सिर्फ रेत का नहीं है. सवाल है कानून का, सवाल है प्रशासन का, सवाल है शासन-प्रशासन व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास का. मग़र जब लोग कहने लगे कि रेत का तेल निकालने में लगे हैं, लिख-लिखकर स्याही और कागज बर्बाद कर रहे हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन-प्रशासन के प्रति लोगों की धारणा कैसी हो चली है. सत्ताधीशों के करीबी होने का दम्भ भरने वाले माफिया सरीखे लोगों के अवैधानिक कृत्य पर कानून का डंडा या तो चलता ही नहीं या चलता भी है तो उस तरह नहीं चलता, जिस तरह आम लोगों पर चलता है. माफियाओं पर कानून का डंडा चलाने की नौबत भी आन पड़े, तब भी डंडा चलाने का केवल अभिनय ही किया जाता है. प्रशासन द्वारा रेत के अवैध भंडारण पर बिरकोनी में की गई हाल की कार्रवाई से कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है.
”कहां है जांच दल : जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर पहुंचने में क्या 15 साल लगेंगे?” इस शीर्षक से ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ में खबर प्रकाशन के बाद खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बिरकोनी में जांच कार्रवाई के लिए पहुंची थी. वहां क्या जांच और कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी देने से अफसर कतरा रहे हैं. क्योंकि जानकारी देंगे तो भेद खुल जाएगा. सूत्रों से पता चला है कि प्रशासन की टीम ने पंचनामा कर रेत के कुछ अवैध स्टाकों की जब्ती बनाई है. इनमें चंडी मंदिर के आगे नहर की ओर, पौधरोपण क्षेत्र, परसवानी रोड और औद्योगिक एरिया के बीचों-बीच विद्युत सब-स्टेशन के लिए आरक्षित प्लॉट पर डम्प रेत शामिल है. हालांकि सूत्रों का दावा है कि इन मौकों पर जितनी मात्रा में रेत स्टॉक है, कागजों पर उससे कम की जब्ती दर्शाई गई है.
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आगे क्या कार्रवाई की जाती है, यह गौर करने लायक होगी. क्योंकि रेत के कुछ बड़े स्टॉक तो सरकार की जमीन पर हैं. जिस तरह इससे पहले बड़ी उदारता के साथ अवैध स्टॉकों को वैध करते हुए भंडारण की अनुज्ञा जारी की गई, उसी तरह सरकारी जमीन पर भी अनुज्ञा जारी की जाती है तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. आने वाले समय में रेत के अवैध भंडारण की होड़ मच जाएगी, चाहे किसी खास प्रयोजन के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर ही क्यों न करना पड़े. रेत का तेल निकालने के उद्यम में ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ की टीम प्रशासन की टीम द्वारा की गई जांच-कार्रवाई की पूरी पड़ताल आगे जरूर करेगी. बहरहाल, यह चर्चा है कि इस कार्रवाई के लिए निकलने में ही अधिकारियों का पसीना छूट रहा था. माफियाओं से वे रिरियाते रहे कि बुरा न मानिएगा, हमें आना पड़ेगा और कार्रवाई के नाम पर कुछ दिखाना पड़ेगा.
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