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‘टूल-किट मामले में हाईकोर्ट की फटकार के बाद मुख्यमंत्री बघेल में ज़रा भी ग़ैरत बाकी हो तो तुरंत इस्तीफ़ा दें’

Published on: June 14, 2021
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने टूल-किट मामले में हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल में हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब ज़रा भी ग़ैरत बाकी हो तो बिना 17 जून का इंतज़ार किए मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए. उन्होने हाईकोर्ट द्वारा भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के विरुद्ध राजधानी के सिविल लाइंस थाने में दर्ज़ एफ़आईआर पर विवेचना समेत पूरी कार्रवाई पर रोक लगाए जाने के निर्णय को न्याय, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्य की विजय बताते हुए पार्टी-परिवार की ओर से प्रसन्नता व्यक्त की है.

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श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार संभवत: देश की ऐसी पहली सरकार होगी जिसने अपने महज़ ढाई साल के कार्यकाल में राजनीतिक नज़रिए से लिए गए अमूमन सभी फ़ैसलों के लिए हर बार हाईकोर्ट की फटकार खाई है, बावज़ूद इसके, यह सरकार अपनी ओछी राजनीति और हरक़तों से बाज आने को तैयार ही नहीं है. उन्होने इससे पहले भी भाजपा प्रवक्ता श्री पात्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर के मामले में हाईकोर्ट की फटकार खा चुकी है. इस बार तो हाईकोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा है कि इस मामले में विवेचना को जारी रखना क़ानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. श्री साय ने कहा कि एक तरफ प्रदेशभर के थानों में पीड़ितों की एफ़आईआर दर्ज़ नहीं किए जाने की शिकायतें आम हैं, वहीं दूसरी तरफ़ प्रदेश सरकार ने राजनीतिक विद्वेष और प्रतिशोध भंजाने की बदनीयती का प्रदर्शन करते हुए भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ पूरे पुलिस तंत्र को झोंक रखा है. उन्होने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह और प्रवक्ता श्री पात्रा के ख़िलाफ़ टूल-किट मामले में भी प्रदेश सरकार द्वारा दर्ज एफ़आईआर को इसी राजनीतिक प्रतिशोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने भी यह टिप्पणी की है कि यह पूरी कार्रवाई राजनैतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित लगती है.

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श्री साय ने यह कहकर कि, लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने पर आमादा कांग्रेस की इस प्रदेश सरकार से किसी नैतिकता और शर्म-ओ-हया की उम्मीद पूरी तरह बेमानी है, कटाक्ष किया कि एसआईटी गठन के लगभग हर मामले में हो या पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के तौर पर सियाराम साहू की बहाली का मामला हो, वैक्सीनेशन में आरक्षण की राजनीति हो या वैक्सीनेशन अभियान, हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रदेश सरकार को उसके रवैए पर हर बार कड़े शब्दों में फटकारा है. बावज़ूद यह प्रदेश सरकार अपनी राजनीतिक क्षुद्रता के प्रदर्शन पर हमेशा आमादा रही है. उन्होने कहा कि हर मामले में हाईकोर्ट की फटकार खाने के बाद अब तो मुख्यमंत्री बघेल को शर्म महसूस होनी ही चाहिए और बिना 17 जून का इंतज़ार किए तत्काल इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

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