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‘आंधी-बारिश से फसल बर्बाद, 20 हजार प्रति एकड़ क्षतिपूर्ति राशि दें सरकार’

Published on: May 13, 2021
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बागबाहरा. क्षेत्र में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से रबी की धान फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार हो चुकी थी पर बेमौसम बारिश से धान के पौधों से दाना झड़ गया अब सिर्फ पैरा बचा है. जनपद अध्यक्ष श्रीमती स्मिता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ और केन्द्र सरकार से मांग की है कि फसल क्षति का मुआयना कर किसानों को लागत राशि अनुरूप क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि भुगतान करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यहां के किसान हमेशा से सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि से अकाल की चपेट में आते हैं इसलिए किसानों की रीढ़ कमजोर हो चुकी है. प्रति वर्ष खेती में नुकसान से आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे हैं. सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने अवसर प्रदान करें.

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किसानों को कम से कम 20 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से क्षतिपूर्ति राशि का अविलंब भुगतान करना सुनिश्चित करें ताकि महीने भर बाद वे खरीफ सीजन की खेती की तैयारी कर सकें. उन्होने कहा कि सरकार रबी सीजन के धान को केन्द्रीय समर्थन मूल्य में खरीदी करने का आदेश दें चूंकि खुले बाजार में धान की कीमत 12-13 सौ रुपए तक ही है इस दर पर लागत राशि भी वसूल नहीं हो पा रही है. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चंद्राकर ने कहा कि खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में किसान भाईयों ने रबी धान की खेती की है जिसका अधिसूचित नहीं होने से फसल बीमा नहीं हुआ है. विगत दिनों क्षेत्र में लगातार आंधी, बारिश से पक चुके धान का दाना बहुत मात्रा में खेत में ही झड़ गया है. खेतों में पानी भर गया है जिससे सप्ताह भर कटाई नहीं हो पाएगी. हार्वेस्टर मालिक 300 रुपए प्रति एकड़ अधिक माँगने लगे हैं.

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धान का भाव न होने से वैसे भी किसान पहले से औने-पौने रेट पर धान बेच रहे हैं. उन्होने कहा किभाजपा शासनकाल में फौजी कीट से धान फसल के बर्बाद होने पर तत्कालीन कृषि मंत्री ननकीराम कंवर ने, लगभग चार साल पहले क्षेत्र में अकाल पड़ने पर तत्कालीन कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल राहत राशि प्रदान कर चुके हैं. उक्त राहत राशि फसल बीमा योजना की राशि के अतिरिक्त शासन द्वारा किसानों को दी गई थी. खल्लारी क्षेत्र वैसे भी शासकीय रिकॉर्ड में अकाल प्रभावित एवं कार्य अभाव में अन्यत्र पलायन करने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. इस स्थिति में मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति और भविष्य की कृषि जरूरत को ध्यान में रखते हुए तुरंत ही उक्त कोष से प्रभावित किसानों को राहत राशि व क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करें.

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