আবহাওয়া আইপিএল-2025 টাকা পয়সা পশ্চিমবঙ্গ ভারত ব্যবসা চাকরি রাশিফল স্বাস্থ্য প্রযুক্তি লাইফস্টাইল শেয়ার বাজার মিউচুয়াল ফান্ড আধ্যাত্মিক অন্যান্য
---Advertisement---

‘उर्वरकों के दामों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस नेता और कृषि मंत्री किसानों को ग़ुमराह कर उकसा रहे’

Published on: May 12, 2021
---Advertisement---

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश प्रभारी संदीप शर्मा ने कृषि उर्वरकों के दामों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस नेताओं और कृषि मंत्री रवींद्र चौबे पर प्रदेश के किसानों को ग़ुमराह कर उकसाने का आरोप लगाया है. उन्होने यूपीए शासनकाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के शासनकाल में खाद की कीमतों का तुलनात्मक ब्योरा देते हुए कहा कि कांग्रेस गठबंधन के शासनकाल की तुलना में खाद के दाम भाजपा शासनकाल में सात साल से स्थिर रहे और इन सात सालों में लगातार कृषि उपजों के समर्थन मूल्य तथा अन्य अनेक विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ पहुँचाकर केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान किया है.

http://करीना के गाने पर ‘बजरंगी भाईजान’ की मुन्नी ने किया शानदार डांस, वीडियो वायरल

श्री शर्मा ने बताया कि यूपीए शासनकाल में सन 2014 में डीएपी 1350 रुपए, एनपीके 1270 रुपए और एनओपी (पोटाश) 945 रुपए में बिक रही थी, जिसके दाम घटाकर प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार ने क्रमश: 1250 रु, 1185 रु और 840 रुपए किया और ये दाम बिना वृद्धि के पिछले सात वर्षों से स्थिर हैं. अब सात साल के बाद इन उर्वरकों के दाम क्रमश: 1800 रु, 1747 रु और 1000 रु प्रति बोरी किया गया है, जबकि सुपर फास्फेट अब भी पुराने दाम 370 रुपए पर ही बाज़ार में उपलब्ध है. उन्होने कहा कि जिन उर्वरकों की मूल्यवृद्धि हुई है, सन 2014 से उसकी तुलना की जाए तो यह वृद्धि औसतन 30 प्रतिशत ही है. अगर प्रतिवर्ष इनकी क़ीमतें 04 से 05 फ़ीसदी बढ़तीं तो मूल्यवृद्धि का यह प्रतिशत 35 होता. श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश के कृषि मंत्री चौबे ने डीएपी का मूल्य 1900 रु और सुपरफास्फेट के दाम में 37 रु बढ़ोतरी की बात कही है, जबकि डीएपी आज बाज़ार में 1800 रु में मिल रही है और सुपरफास्फेट का तो दाम आज भी पूर्ववत ही है. कृषि मंत्री चौबे पर खाद की क़ीमतों के ग़लत आँकड़े दे रहे हैं.

उन्होने कहा कि पिछले सात वर्षों में केंद्र सरकार ने विभिन्न कृषि उत्पादों के समर्थन मूल्य में अब तक 45 से 80 प्रतिशत बढ़ोतरी की है जो किसानों को इन सात सालों में क्रमश: बढ़ती दर पर मिला. धान का समर्थन मूल्य सन 2014 के 1310 रु के मुक़ाबले आज 1888 रु और गेहूँ का समर्थन मूल्य 1380 रु के मुक़ाबले आज 1975 रु हो गया है. इन दोनों मुख्य फसलों के समर्थन मूल्य में 45 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. श्री शर्मा ने बताया कि देशभर के किसानों को पिछले तीन साल से 60 से 65 हज़ार करोड़ रुपए सालाना के हिसाब से 02 लाख करोड़ रुपए किसान सम्मान निधि के तौर पर सीधे किसानों के खातों में जमा हुए. इस प्रकार विभिन्न योजनाएँ लागू कर केंद्र सरकार ने किसानों को आर्थिक मज़बूती प्रदान की है.

http://सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट, जानिए नया भाव

श्री शर्मा ने यह भी बताया कि कृषि दवा के तौर पर काम आने वाला नोमीनो गोल्ड वर्ष 2014 में 8500 रु प्रति लीटर मिल रहा था जिसकी क़ीमत घटाकर भाजपा की केंद्र सरकार ने 4500 रुपए प्रति लीटर कर दी है जिससे निंदानाशक कार्य में किसानों को बड़ा फ़ायदा हो रहा है. इसी तरह खाद के दामों में जो बढ़ोतरी हुई है, उसके एवज़ में अभी किसानों को आगामी ख़रीफ़ व रबी फसल के बढ़ने वाले समर्थन मूल्य का लाभ भी मिलेगा. उन्होने प्रदेश के कृषि मंत्री चौबे को नसीहत दी है कि वे प्रदेश के किसानों को ग़ुमराह करने के बजाय इस बात की चिंता करें कि वर्ष 2018 में प्रदेश में भाजपा शासनकाल के दौरान जो धान 1400-1500 रु प्रति क्विंटल बिकता था, वही धान इस वर्ष 2020-21 में 1200 रुपए में क्यों बिका. इसी तरह प्रदेश में भाजपा शासनकाल में रबी फसल का धान समर्थन मूल्य से 100 रु कम में बिका लेकिन वही धान आज कांग्रेस शासन में 600 रु कम में क्यों बिका. श्री शर्मा ने कहा कि फ़िज़ूल की बयानबाजी कर किसानों को ग़ुमराह करने के बजाय प्रदेश के कृषि मंत्री और कांग्रेस नेताओं को किसानों के साथ हो रही लूट को रोकने पर ध्यान देना चाहिए.

जुड़िए हमसे….
https://www.facebook.com
https://cgjanadesh.com
https://cgjanadesh.com/category
8871342716

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now