रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2020-21 के आर्थिक सर्वेक्षण को प्रदेश की प्रदेश सरकार के निकृष्टतम शासनकाल का कलंकित दस्तावेज़ बताया है. उन्होने कहा कि महज़ दो साल में ही प्रदेश की आर्थिक हालत को चौपट करने और प्रति व्यक्ति आय घटाकर रख देने वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार का अब भी अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू बनने से उबरने को तैयार नहीं होना विस्मित कर रहा है. श्री साय ने कहा कि विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में सकल घरेलू उत्पाद में वर्ष 2019-20 की तुलना में 1.77 फ़ीसदी की गिरावट यह बताती है कि प्रदेश लगातार आर्थिक बदहाली की ओर जा रहा है. जीडीएसपी में गिरावट के साथ उद्योग क्षेत्र में 5.82 फ़ीसदी की कमी आई है और अपने निर्माण के बाद से पिछले 20 वर्षों में छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति आय पहली बार घटी है.
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उन्होने कहा कि जिस छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2000 से लेकर 2019-20 तक प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी दर्ज़ की जाती रही, उस प्रदेश के समूचे अर्थतंत्र को प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मटियामेट करके रख दिया है. यह आर्थिक सर्वेक्षण यह साबित करता है कि प्रदेश सरकार ने निकम्मेपन की पराकाष्ठा कर दी है. श्री साय ने कहा कि प्रदेश के बड़बोले और ‘चिठ्ठीजीवी’ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिस छत्तीसगढ़ मॉडल का ढोल पीट-पीटकर अपनी शेखी बघारते नहीं अघा रहे थे और केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाने की नसीहतें देकर अपने राजनीतिक अहंकार का परिचय देते फिर रहे थे, प्रदेश के वर्ष 2020-21 के इस आर्थिक सर्वेक्षण के दरके आईने में अपनी सरकार के राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक नाकारापन की छवि से कहां तक मुँह छिपाएंगे. उन्होने कहा कि इस आर्थिक सर्वेक्षण ने फिर से प्रदेश सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का काला सच प्रदेश के सामने ला दिया है. श्री साय ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आज प्रदेश 60 हज़ार करोड़ रुपए के कर्ज़ के बोझ तले दबा है. प्रदेश सरकार का बज़ट लगभग 01 लाख करोड़ रुपए का होने का अनुमान है. इस नज़रिए से आने वाले वर्षों में यह सरकार प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ लाद देगी, यानी प्रदेश के बज़ट के बराबर ही प्रदेश पर कर्ज़ का बोझ रहेगा.
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अगर इसी तरह कर्ज़-पर-कर्ज़ लिया जाता रहा तो भूपेश-सरकार को कर्ज़ का ब्याज चुकाने के लिए कर्ज़ लेना पड़ जाएगा. उन्होने कहा कि प्रदेश की भूपेश-सरकार ने दो साल के अपने शासनकाल में कोई रचनात्मक और सकारात्मक पहल करके प्रदेश के आर्थिक संसाधनों को विकसित करने का काम किया ही नहीं. माफियाओं, शराब के गोरख-धंधेबाजों और तमाम ग़ैर-क़ानूनी कारोबारियों से कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करके प्रदेश के अर्थतंत्र की कमर तोड़ने में लगी इस प्रदेश सरकार के कार्यकाल में विकास पूरी तरह ठप है. केंद्र सरकार की राशि से जो काम हो रहे हैं, स्मार्ट सिटी योजना के तहत ही हो रहे हैं, मनरेगा में हो रहे हैं, और इन कामों को भी प्रदेश सरकार अपना काम बताकर झूठा प्रचार कर रही है!







