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गांव पहुंच हाथियों ने जमकर मचाया उत्पात, ग्रामीणों में दहशत

Published on: February 7, 2021
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पिथौरा. महासमुंद जिला मुख्यालय के नजदीक स्थित ग्राम पीढ़ी में तीन हाथियों ने किसान सोहन निषाद की बाड़े में रखे करीब 50 कट्टा धान खा गए. बहरहाल, घटना की जानकारी वन विभाग को दे दी गई है. ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय के आसपास के कुछ गांवों में हाथी अपनी भूख मिटाने लगातार उत्पात मचाए हुए हैं जिससे ग्रामीणों में दहशत है. जानकारी के अनुसार सुबह करीब 5 बजे लहंगर धान खरीदी केंद्र से भगाए जाने के बाद तीन विशालकाय हाथियों का झुंड अलसुबह समीप के ग्राम पीढ़ी पहुंच गया. यहां हाथी गांव की गलियों में घूमकर भोजन की तलाश कर रहे थे.

इस बीच सोहन निषाद के एक बाड़े में हाथियों ने पहले बाड़े में लगे महाराजा गेट को तोड़ डाला बाद बोरियों में भरकर रखे धान को खाने लगे. करीब 60 कट्टा धान हाथियों ने जमीन में बिखेर दिया. एक अनुमान के अनुसार इसमें से 40 कट्टा से अधिक धान तीनों हाथी कहा गए. जबकि इस गांव में पूर्व से गजराज वाहन तैनात है. घटना की जानकारी के बाद से माइक में एलाऊन्स कर बाहर निकलने से ग्रामीणों को रोका गया है. यही हाथियों का दल इसके पूर्व रात में लहंगर वन नाका से लगे बाड़ी में घुसकर सब्जी को भारी नुक़सान पहुंचाकर पीढ़ी ग्राम पहुंचे थे.

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वन विभाग समाधान निकाले : सिन्हा

हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने बताया कि बीती रात लहंगर और पीढ़ी में तीन हाथियों ने तबाही मचाया है. लोग हाथियों से दहसत में आ गए हैं. पीढ़ी में ज्यादा नुक़सान की जानकारी मिल रही है. सरपंच द्वारा मौका जांच के लिए वन विभाग को संज्ञान में लेते हुए किसान हित में सहयोग करने की अपील की है तथा लहंगर के धान खरीदी केन्द्र के साथ ही साथ घर बाड़ी में पहुंचकर जो नुक़सान हुआ है उसे भी निरीक्षण करें.

अफसरों के बेतुके प्रयोग असफल

ज्ञात हो कि इसके पूर्व महासमुंद सहित प्रदेश के वन अफसरों द्वारा हाथियों के आतंक से ग्रामीणों को निजात दिलाने दर्जनों बेतुके प्रयोग कर शासन के करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिए गए. बावजूद अब तक हाथियों के रहवास हेतु ना कॉरिडोर बन पाया और ना ही जंगल मे उनके खाने के कोई पेड़-पौधे ही बढ़ पाए लिहाजा हाथी की समस्या जस की तस है जिससे लगातार क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं और हाथियों के सामने भी दाना-पानी की गम्भीर समस्या है जिसके कारण वे लगातार गांवों में हमले भी कर रहे हैं.

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