महासमुंद. जिले के प्रभारी मंत्री, आबकारी एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा गुरूवार को सरायपाली के ग्राम पुजारीपाली में बरिहा आदिवासी समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपने संस्कृति और परम्पराओं के लिए जाना जाता है. उनकी देवी-देवताओं में अटूट आस्था है. आदिवासी प्रकृति पर आधारित हर मौके फसल बोने से लेकर काटने और शादी जैसे रश्मों को उत्सव के रूप में मनाते हैं. उन्होने कहा कि दुनिया को बदलने के लिए बुद्धिमता की नहीं बल्कि सहजता की जरूरत है तभी आदिवासी समाज बचा रहेगा. उन्होंने कहा आदिवासी समाज को समझने के लिए उनके रहन-सहन, बोली, परम्परा और संस्कृति को समझना पड़ता है. इस अवसर पर मंत्री श्री लखमा ने विंध्यवासिनी मंदिर का उद्घाटन किया.
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शिशुपाल पर्वत को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र घोषित करने के लिए हरसम्भव प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह पर्यटन मंत्री के कार्यक्षेत्र का मामला है लेकिन फिर भी वे इसके लिए उनसे मिलकर चर्चा करेंगे. उन्होंने कहा कि हम हजारों वर्षों से प्रकृति की गोद नदी, पहाड़ और जंगल से जुडे़ हुए हैं. शिशुपाल पर्वत काफी सुन्दर स्थल है. मकर संक्राति के पर्व पर प्रतिवर्ष यहां उत्सव मनाया जाता है. यह एक ऐसा पर्व है जिसे भारत के सभी राज्यों में अलग-अलग तरह से सभी वर्गों के लोग पूरी आस्था के साथ मनाते है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न तीज-त्यौहारों के पर्व पर शासकीय अवकाश भी घोषित किए हैं. मंच पर विधायक सरायपाली किस्मत लाल नंद और अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वन निगम एवं विधायक बसना देवेन्द्र बहादुर सिंह मौजूद थे.
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