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‘3 दिन के अंदर वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का पंजीयन न होने पर किया जाएगा धरना-प्रदर्शन’

Published on: November 23, 2020
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बागबाहरा. जनपद अध्यक्ष स्मिता हितेश चन्द्राकर ने वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का 3 दिन के अंदर पंजीयन न होने पर किसानों के साथ धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है. उन्होने कहा कि 10 नवंबर तक बागबाहरा ब्लॉक के सभी 2 हजार से अधिक वनाधिकार पट्टाधारी किसानों का नाम पंजीयन सूची से हटा दिया गया था.10 नवंबर को किसानों के साथ कलेक्टोरेट का घेराव कर ज्ञापन दिया तब जाकर अधिकतर किसानों का नाम जुड़ पाया लेकिन अभी भी दो-ढाई सौ किसानों का नाम अब भी पंजीयन सूची में नहीं जुड़ पाया है. क्योंकि खाद्य विभाग द्वारा पंजीयन का आखिरी दिन 17 नवंबर को लिंक दिया गया लेकिन सर्वर डाउन, समयावधि समाप्त हो जाने के कारण पंजीयन नहीं हो पाया.

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कुछ समितियों में ऑनलाइन गिरदावरी नहीं किए जाने के कारण नहीं जुड़ पाया और वन पट्टाधारी जमीन के साथ लगानी जमीन होने के कारण वन पट्टा जमीन का पंजीयन काट दिया गया जबकि वन पट्टा जमीन पांच एकड़ है और बाद में कम कर खरीदी-लगानी जमीन एक-डेढ़ एकड़ है. इस प्रकार सैकड़ों किसान पंजीयन से वंचित हो गए जो किसानों के साथ अन्याय है. अब शासन-प्रशासन से आदेश भी जारी हो गया कि पिछले वर्ष की भांति कोचिया या दुकानदार धान नहीं खरीद सकते. ऐसे में किसान धान बेचे तो बेचे कहां और धान खरीदी बंद होने के तीन माह बाद बिक भी गया तो 12-13 सौ के दर से मिलेगा जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 12-13 सौ रुपए का नुकसान होगा. ऐसी स्थिति में किसानों के पास संघर्ष के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचता. उन्होने शासन प्रशासन से आग्रह किया है कि अगर तीन दिवस के अंदर विभागीय लापरवाही से पंजीयन से वंचित किसानों का पुनः पंजीयन नहीं किया गया तो वे किसानों के साथ धरना में बैठने बाध्य होएंगी. खम्हरिया सोसाइटी का जोगीडीपा, बहियाडीही के किसानों का सर्वर डाउन होने के कारण पंजीयन नहीं हो पाया. चरौदा सोसाइटी के जीवनगढ़ वन पट्टाधारी किसानों का भी सर्वर डाउन होने के कारण आखिरी दिन पंजीयन नहीं हो पाया. सिर्री पठारी समिति के जामगांव के किसानों का 17 तारीख को 5 बजने के 40 मिनट पहले लिंक दिए समय अवधि समाप्त होने के कारण 12 किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया.

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इसी प्रकार कसेकेरा सोसाइटी में वन पट्टा एवं लगानी जमीन होने के कारण लगानी जमीन का पंजीयन हुआ और वन पट्टा का पंजीयन नहीं हो पाया जबकि लगानी जमीन एक एक-डेढ़ एकड़ है. वन पट्टा का जमीन 5 एकड़ है. इस तरह किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. सांसद चुन्नीलाल साहू ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन करने समयावधि बढ़ाया पर प्रशासनिक लापरवाही के चलते आज किसान समर्थन मूल्य पाने से वंचित हो रहे हैं. छत्तीसगढ़ सरकार यदि किसानों की हितैषी है और किसानों का उत्थान करना चाहती है तो समस्त वन पट्टाधारी किसानों की उपज धान समर्थन मूल्य में खरीदी करने आदेश करें ताकि गरीब, पीड़ित, शोषित किसानों का भला हो सके.

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