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‘प्रदेश सरकार के किसान विरोधी कृत्यों से हताश किसान अब आत्महत्या तक के लिए विवश हो रहे’

Published on: October 16, 2020
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रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने रायपुर ज़िले के गोबरा-नवापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम और दुर्ग ज़िले के नंदिनी में शुक्रवार को किसानों द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने की घटना की जाँच के लिए पार्टी की एक समिति गठित की है. पूर्व मंत्री चंद्रशेखर साहू की अध्यक्षता वाली इस समिति में भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप शर्मा और पूर्व विधायक लाभचंद बाफना है. श्री साय ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार के किसान विरोधी कृत्यों ने अब किसानों को इतना हताश व निराश कर दिया है कि किसान आत्महत्या तक करने के लिए विवश हो रहे हैं.


उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी बदनीयती और खेती-किसानी को लेकर कुनीतियों से उपजी हताशा दूर करने के जतन करने के बजाय अब भी किसानों के नाम पर सियासी ड्रामेबाजी में ही मशगूल है. श्री साय ने कहा कि हाल ही नकली कीटनाशक से फसल खराब होने के कारण इसी दुर्ग ज़िले के मातोरडीह ग्राम के एक युवा किसान ने आत्महत्या कर ली थी. शुक्रवार को गोबरा-नवापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम और नंदिनी में किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के सामने आए मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग करते हुए श्री साय ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और कृषि मंत्री के अपने ही गृह ज़िले में लगभग एक सप्ताह के भीतर किसानों की ख़ुदक़ुशी के लगातार दो मामले सामने आए हैं. आत्महत्या की ये वारदातें इस बात की साक्षी दे रही हैं कि प्रदेश सरकार के पास किसानों के उत्थान की कोई सुविचारित नीति व कार्ययोजना है ही नहीं और वह सिर्फ़ किसानों के नाम पर सियासी शोर मचाने में लगी है.

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उन्होने कहा कि किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए क़ानूनों के ख़िलाफ़ मिथ्या सियासी प्रलाप कर रही प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने किसानों के नाम पर सत्ता तो हासिल कर ली, पर जब काम करके दिखाने की बारी आई तो सरकार के हाथ-पैर फूलने लगे और फिर प्रदेश सरकार ने अपने मूल सियासी चरित्र का प्रदर्शन कर हर मोर्चे पर किसानों समेत हर वर्ग के साथ छल-कपट करना शुरू कर दिया. श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों और गाँव-ग़रीबों के नाम जितनी भी योजनाओं का ढोल पीटा, उनकी पोल खुलते देर नहीं लगी. गौठान हो या रोका-छेका, नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी हो या फिर गोबर ख़रीदी, किसी योजना ने धरातल पर मज़बूती नहीं दिखाई और प्रदेश सरकार की तमाम योजनाएँ दम तोड़ती चली गई हैं.


उन्होने कहा कि आधी-अधूरी कर्ज़माफ़ी, दो साल के बकाया बोनस भुगतान में आनाकानी, धान ख़रीदी के नाम पर तुग़लक़ी फ़रमान जारी करके पूरा धान ख़रीदने से बचने की तिकड़में और फिर पिछले वर्ष ख़रीदे गए धान की क़ीमत की किश्तों में अदायगी ने प्रदेश सरकार की बदनीयती पर तो मुहर ही लगा दी है. श्री साय ने कहा कि बीज निगम द्वारा घटिया बीज देकर किसानों को ठगने का जो सिलसिला इस खरीफ सत्र से शुरू हुआ है, वह प्रदेश सरकार के भ्रष्ट चरित्र के चलते थमने का नाम नहीं ले रहा है. रासायनिक खाद की जमाखोरी व कालाबाजारी ने किसानों को त्रस्त किया तो नकली कीटनाशक दवाओं के कारोबार ने किसानों के अर्थतंत्र की कमर ही तोड़ दी और अब हताश-निराश किसान आत्महत्या के लिए विवश हो रहे हैं. नेशनल क्राइम ब्यूरो के आँकड़ों की चर्चा करते हुए श्री साय ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में किसानों की आत्महत्या की वारदातों ने प्रदेश को शर्मसार किया है.

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