रजिंदर खनूजा
पिथौरा. स्थानीय विकासखण्ड का तीसरा गांव अरण्ड भी अब शराबबंदी की ओर बढ़ गया है. इस गांव में महिलाओं ने हाथ में लट्ठ थामा है और शराब बनाने और पीकर गांव में हुड़दंग करने वालों को सबक सिखाने लगी हैं. करीब माह भर से प्रारम्भ इस अभियान में पुलिस के सहयोग के बगैर ही महिलाएं अपने अभियान में निर्भीक होकर जुटीं हैं. मूलतः आदिवासी बहुल यह गांव शहीद परिवारों के नाम से जाना जाता है. यहां के दो भाई बुढ़ान शाह एवं जहान सिंह सहित चंद्रपाल डड़सेना देश को अंग्रेज शासकों से मुक्त करवाने के संघर्ष में शहीद हुए थे. उक्त तीनों शहीदों के वंशज आज भी यहीं रहते हैं. आजादी के बाद बदलते समय में यह गांव बुरी तरह शराब के चंगुल में फंस चुका था.
इस गांव के युवा शराब की लत में अपना जीवन खराब करने के अलावा गांव की गलियों में भी अक्सर गाली-गलौज कर महिलाओं को शर्मिंदा करते रहते थे. युवाओं के उक्त शौक ने ही गांव के कुछ निठल्लों को मौका दे दिया और वे गांव में ही महुआ सीजन का महुआ एकत्र कर उसकी हथभट्ठी से शराब बनाकर बेचने लगे. गांव में निरंतर बिगड़ता माहौल देख गांव वाले लगातार पिथौरा पुलिस एवं आबकारी से शराब के विरुद्ध कार्रवाई की गुहार करते रहे पर संबंधित विभाग के कान में जूं तक नहीं रेंगी.
अंततः महिलाओं ने सरपंच और गांव के मुखिया शिवचरण ध्रुव से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई. इसके बाद पुनः सरकारी विभागों को इसकी जानकारी दी गई फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तब गांव वालों ने एक बैठक लेकर गांव की करीब 30 महिलाओं को शामिल कर बुढ़ान शाह महिला समिति के नाम से संगठन बनाया और श्रीमती सरस्वती ध्रुव को अध्यक्ष नियुक्त किया. समिति गठन होते ही महिलाओं ने अपने हाथों में लट्ठ थामा और सुबह-शाम घरेलू जिम्मेदारियों से निवृत होने के बाद गांव में शराबियों और शराब बनाने वालों की तलाश में निकल जाती हैं.
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सात मामले पकड़े, शराब नष्ट कर दी समझाइस
महिला समिति की अध्यक्ष सरस्वती ध्रुव के अनुसार अब तक करीब सात शराब बनाने वालों को उन्होंने पकड़ा है. पहले एक मामले में पुलिस को बुलाया गया था पर पुलिस ने शराब पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें समझाइस देकर छोड़ दिया लिहाजा अब वे पुलिस का रास्ता नहीं देखतीं और शराब को तत्काल नष्ट कर ऐसे कर्म करने वालों की पिटाई में विश्वास करने लगी हैं. प्रायः सभी महुआ शराब निर्माताओं के पास से 5-10 लीटर तक शराब मिलती थी जिसे वे तत्काल नष्ट कर देती हैं. अरोपी उनको देखते ही भाग जाते थे पर उनके प्रयासों ने अब अपना रंग दिखाना प्रारंभ किया है. अब गांव में न तो शराब बनाने वाले और ना ही कोई पीने वाले ही दिखते हैं. बावजूद समिति की सदस्य सुबह-शाम गांव में घूम ही रही हैं.
समिति को गणवेश दिया गया
गांव को शराब से दूर कर जीवन स्तर सुधारतीं महिला समिति के लिए गांव प्रमुख शिवचरण ध्रुव ने गुलाबी गणवेश उपलब्ध कराया है. इसी तरह इन महिलाओं की ताकत बढ़ाने करीब दर्जन भर युवक भी साथ रहते हैं. जिन्हें भी एक ही तरह के गणवेश श्री ध्रुव ने उपलब्ध कराया है.
शराब नहीं बिकने देंगे : सरपंच
सरपंच और शहीद बुढ़ान शाह के वंशज देशराज सिंह ठाकुर ने बताया कि गांव के युवाओं को शराब की लत से दूर रखने के लिए सभी ग्रामीणों के सहयोग से उक्त कार्य योजना बनाकर किया जा रहा है. अवैध शराब पकड़ने के लिए पुलिस से अनेक आग्रह के बाद भी ज़ब कोई समाधान नहीं निकला तब ग्रामीणों के सहयोग से उक्त अभियान का आगाज किया गया है जो कि आगे भी जारी रहेगा.
जानकारी नहीं : थाना प्रभारी, आबकारी
दूसरी ओर स्थानीय थाना प्रभारी अपूर्वा सिंह ने इस प्रतिनिधि को बताया कि शराब पकड़ने के बाद कार्रवाई हेतु कभी कोई नहीं आया. अरण्ड गांव के कुछ लोग थाना आकर उन्हें महिला समिति गठन के बारे में जानकारी दिए थे. इस पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि जब भी पुलिस की जरूरत हो उन्हें जानकारी दें वे तत्काल कार्रवाई करेंगी. वहीं आबकारी उपनिरीक्षक केके सोनी ने बताया कि उन्हें यहां पदस्थ हुए मात्र एक माह हुए हैं. इस बीच उन्हें उक्त गांव में शराब पकड़ने की किसी ने कोई जानकारी नहीं दी. जानकारी मिलते ही वे स्वयं तत्काल कार्रवाई हेतु पहुंच जाएंगे.
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