रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुनील सोनी ने नगरीय निकाय चुनाव को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा नियम-कायदों की अनदेखी को संवैधानिक मर्यादाओं व लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है. श्री सोनी ने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सिफारिशों को अंतिम निर्णय मानकर कायदों की अनदेखी कर रही है. वस्तुतः उपसमिति की सिफारिशों को कैबिनेट की बैठक में रखकर पारित कराना होता है और फिर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद वह अध्यादेश लागू होता है. लेकिन कैबिनेट में चर्चा व अनुमोदन और राज्यपाल की मंजूरी की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रदेश सरकार जिस तरह का राजनीतिक आचरण कर रही है, वह न केवल संविधान व संसदीय लोकतंत्र की परम्परा का खुला अल्लंघन है, अपितु यह आचरण दर्शाता है कि राज्य सरकार एकांगी दृष्टिकोण रखकर इस मसले पर हड़बड़ी करके मनमानी करने पर उतारू है.
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उन्होने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि प्रदेश सरकार निकाय चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ होने और परिसीमन हो चुकने बाद इस तरह के अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक फैसले कर रही है. एक बार चुनावी प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद उस प्रक्रिया में दखल देने से अदालतें भी परहेज करती हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ने असंवैधानिक, असंसदीय और अलोकतांत्रिक आचरण करके मनमानी करने की ठान रखी है. उनके इस फैसले से यह तो साफ हो ही गया है कि वह निकाय चुनावों में अपनी पराजय को साफ देख रही है और इसीलिए चुनाव बाद जनादेश की पवित्रता और भावनाओं को धनबल-बाहुबल और छल-कपट व खरीद-फरोख्त के जरिए पलटने की मंशा रख रही है क्योंकि पार्षदों पर दलबदल कानून के प्रावधान लागू नहीं होते और प्रदेश की कांग्रेस सरकार इसी प्रावधान का गलत फायदा उठाना चाहती है.
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