खरसिया. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आदिम जाति सहकारी समितियों द्वारा धान खरीदी के दौरान व्यापक अनियमितताएं देखी जा रही हैं. हाल ही में जैमूरा टीएसएस में लाखों का गबन पाया गया है. जानकारों का कहना है कि उच्चाधिकारियों द्वारा सभी समितियों की सूक्ष्मता से जांच की जाए तो इतनी राशि का गबन जरूर मिल जाएगा जिससे पूरे विकासखंड का विकास संभव हो सके. हालांकि उल्लेखनीय बात होगी कि समितियों के गठन में नाम मात्र के लिए भोले आदिवासियों को शामिल किया जाता है. जबकि इन भोले-भाले लोगों को सिवाय आरोपों के या फिर दंड के कुछ और प्राप्त नहीं हो पाता. वहीं चालाक प्रबंधन एवं रसूखदार लोग बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाते हैं, साथ ही धांधली भी व्यापक रूप में करते रहते हैं.
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बमुश्किल दो बार होते हैं उपस्थित
चपले टीएसएस समिति के सदस्य दयाशंकर दर्शन ने बताया कि चालाक प्रबंधन द्वारा समिति के भोले सदस्यों को आवक जावक खरीदी बिक्री आदि की कोई जानकारी नहीं दी जाती. ना ही कभी कोई बैठक आहूत की जाती. जबकि उच्चाधिकारियों को झूठे प्रपत्रों के माध्यम से लगातार बरगलाया जाता है. वहीं समिति अध्यक्ष साल में मात्र दो बार ध्वजारोहण हेतु ही मंडी में पहुंचने के अलावा सिर्फ चेक साइन करने के लिए ही मंडी पहुंचते हैं. दर्शन ने बताया कि जैमूरा टीएसएस की तरह विकासखंड की एक और एसएस पर अंकेक्षण एवं जांच अधिकारियों द्वारा जांच में लाखों रुपए के व्यय का हिसाब प्राप्त ना होने पर समिति सदस्यों पर गबन आरोपित किया गया है. हालांकि इस मामले में अब तक कार्रवाई पेंडिंग है. वहीं अन्य समितियों पर भी गबन के मामले ठंडे बस्ते में चले गए हैं.
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पुण्यों की गंगा में बह जाते हैं पाप ?
सांठगांठ में निपुण होने के बाद कितनी भी अनियमितताएं कर ली जाएं सब रफा-दफा कर दी जाती हैं. देखा जा रहा है कि मेहनतकश किसानों की पसीने बहा कर उपजाई फसल पर लाखों रुपए पाप की कमाई कर लेने के बाद बड़े बड़े धार्मिक आयोजन कर सभी पापों को पुण्य की गंगा में बहा दिया जाता है. ऐसे में ब्लॉक की सभी 10 समितियों की सूक्ष्म जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आएंगी वहीं शासन को करोड़ों रुपए का मुनाफा प्राप्त होगा जिससे आदिवासी क्षेत्र के विकास को मदद मिलेगी.







