बागबाहरा. बागबाहरा सरपंच संघ के 16 जुलाई के निर्विरोध निर्वाचन को अलोकतांत्रिक बताने वाले सरपंच कांग्रेस की गोद में बैठकर आखिरकार सरपंच संघ को दो फाड़ करने में सफल हो गए. सरपंच संघ के अध्यक्ष एवन साहू, कार्यकारी अध्यक्ष भूखनलाल सिन्हा, सचिव हेमंत सिन्हा ने कहा है कि सरपंच जनता को हमेशा जोड़ने का काम करते हैं वहीं कुछ मौकापरस्त नेता लोगों को तोड़ने और बांटने का काम करते हैं. उसका जीता जागता सबूत जनपद पंचायत बागबाहरा के सरपंच संघ को दो भागों में बांटकर आपसी मतभेद को बढ़ावा देना है. सरपंच संघ इसकी घोर निंदा करता है. सरपंचों ने कहा कि सरपंच गैर दलीय होते हैं किसी पार्टी चिन्ह से वे चुनाव जीतकर नहीं आते. सरपंच संघ के चुनाव को हमारे सरपंच साथी एडिशन ठाकुर ने कांग्रेस नेताओं के साथ प्रेसवार्ता कर भाजपा पर दबाव डालकर चुनाव कराने का आरोप लगाया जबकि इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है.
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सरपंचों ने आमराय से संघ का चुनाव किया तब भी भाजपा का कोई नेता या कार्यकर्ता सरपंच के बीच में नहीं थे. रही बात जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यों की उपस्थिति तो उन्हे बतौर अतिथि आमंत्रित किया गया था न कि भाजपा को. लेकिन कांग्रेस नेता के साथ मिलकर अनावश्यक रुप से सरपंच संघ को बदनाम करने की नीयत से मिथ्या मनगढंत बेबुनियाद आरोप लगाया हम इसकी निंदा करते हैं.16 जुलाई के सरपंच संघ के चुनाव को अलोकतांत्रिक बताने वाले क्या बताएंगे प्रेसवार्ता में कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष और विधायक प्रतिनिधि को किस आधार पर साथ में रखे हुए थे. कांग्रेस के नेता भी बताएं वे किस आधार पर सरपंच के साथ प्रेसवार्ता में बैठे थे. कांग्रेस नेताओं द्वारा सरपंच संघ को बांटने की राजनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है.16 जुलाई को चुनाव बाद सरपंचों के साथ खुद एडिशन ने मुलाकात की उनके साथियों ने कहा जो हुआ ठीक है अब सबको एक साथ लेकर चलना होगा. फिर किसके इशारे पर संघ को तोड़ा गया. बात यहीं खत्म नहीं हुई 19 जुलाई को सरपंचों को सम्मान के नाम पर खल्लारी में सरपंचों को बुलाया गया था आखिर पांच महीने बाद सम्मान करने की याद क्यों आई.
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क्या 16 जुलाई के सरपंच संघ का गठन हुआ है उसे तोड़ने और बांटने के लिए सम्मान समारोह का बहाना किया गया था. कांग्रेस ने रणनीति के तहत सरपंच संघ को तोड़ने और अपनी राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति करने सरपंच संघ का पुनः गठन करने के उद्देश्य के तहत 22 जुलाई को कांग्रेस के नेता सरपंचों को उठाते नजर आए तब एडिशन ठाकुर और कांग्रेस के नेताओं को लोकतंत्र की याद क्यों नहीं आई.22 जुलाई को हुए सरपंच संघ के चुनाव में कांग्रेस नेताओं को किस आधार पर रखा गया था. क्या सरपंचों पर दबाव बनाने के लिए. सचिव संघ को एक करना कुछ नेताओं को नागवार गुजरी इसलिए वे सरपंच संघ को दो गुट में बांटकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं. सरपंचों ने कहा कि दूसरों पर ऊंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए और दूसरों पर कीचड़ उछालने से बाज आएं.







