बागबाहरा. जनपद पंचायत बागबाहरा के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता नरेन्द्र चंद्राकर ने कहा है कि पूर्व में शासकीय सेवा की आयु 58 साल था और संविदा का प्रावधान नहीं होने से बेरोजगार युवाओं को शीघ्र ही सरकारी नौकरी मिल जाती थी लेकिन सरकार द्वारा सेवा आयु में वृद्धि कर 62 और कुछ वर्ग के लिए 65 साल किया गया है जो बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के साथ साथ राष्ट्रीय धन का दुरूपयोग करना भी है. एक तरफ बेतहाशा बेरोजगारी का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ते जा रहा है और सरकारें नौकरी में भर्ती नहीं कर रही है. नई भर्ती करने के बजाए प्रतिनियुक्ति और संविदा जैसे कानून लाकर बेरोजगारों के भविष्य के साथ बुरी तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है. नौकरी की लालसा प्रतीक्षा में अनेक योग्य अभ्यर्थी सरकारी नियम कानून के कारण उम्र पार कर अयोग्य हो रहे हैं.
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व्यवहार में देखा जाता है कि औसत व्यक्ति 58 साल के बाद शारीरिक, मानसिक, वैचारिक रूप से कमजोर होने लगता है. वह स्वयं भी घर, परिवार, ऑफिस में खुद को अधिक आयु के होने का हवाला देकर दायित्व से मुक्त करने, आसान काम देने या गृह क्षेत्र में पोस्टिंग करने की मांग करता रहता है. पर नेतागण वोट की राजनीति के कारण जान बूझकर बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर उन पर हर प्रकार से अयोग्य व्यक्ति को सेवा वृद्धि का अनुचित लाभ दे रही है. जबकि शासकीय नौकरी के अंतिम अवधि के वेतन से या सेवा वृद्धि में दिए जाने वाले प्रति माह के वेतन से एक के बदले तीन उसी योग्यता के बेरोजगार युवाओं को वेतन दिया जा सकता है और काम उससे दोगुना लिया जा सकता है. उन्होने कहा कि कुछ नेताओं के चहेते अधिकारी को तो रिटायर्ड होने के दूसरे दिन ही पुनः संविदा नियुक्ति का आदेश पत्र दे दिया जाता है. इसके लिए उनके सेवाकाल में किए गए कार्य का आंकलन भी नहीं करते. नेता अपना वोट बैंक के लिए बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ मजाक करते आ रहे हैं.
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चंद्राकर ने कहा जब एक तरफ 58 साल को बढ़ाकर 62 साल किया गया और 62 साल में सेवामुक्त करने के बजाए पुनः संविदा में नौकरी देने वाला काला कानून को सरकार समाप्त करें या 62 साल को पुनः 58 साल करें ताकि युवा बेरोजगारों को सरकारी नौकरी मिल सके. उन्होने कहा कि लॉकडाउन, कोरोना आदि के कारण भविष्य में यह समस्या और भयंकर होने वाली है. रोजगार के अभाव में बेरोजगार युवाओं का गलत कार्य करने का अंदेशा बढ़ना स्वाभाविक है इसलिए बेरोजगार युवाओं को और उनके पालक को इस विषय पर गंभीर रूप से चिंतन करना चाहिए और सेवा वृद्धि तथा संविदा नियुक्ति पर पाबंदी लगाने की मांग शासन से करनी चाहिए. शासन की इस गलत नीति के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए तैयार होना चाहिए ताकि शासन में बैठे लोग संविदा और प्रतिनियुक्ति जैसे कानून पर पुनर्विचार कर युवा वर्ग के लिए नौकरी का रास्ता खोलें.
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— Cg Janadesh (@CJanadesh) July 23, 2020







