बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेंद्र चंद्राकर ने कहा कि भारतीय राजनीति में नेहरू जी को वंशवाद का प्रणेता कहा जा सकता है. नेहरू जी के वंशज सिर्फ उनके वंशज होने के कारण आज राष्ट्रीय राजनीति में 60 वर्षों से काबिज हैं. उसी परम्परा का निर्वाह आगे चलकर जम्मू कश्मीर में अब्दुल्ला मुफ्ती मोहम्मद, पंजाब में बादल, उत्तरप्रदेश में यादव, बिहार में लालू प्रसाद यादव, महाराष्ट्र में ठाकरे और शरद पवार की पुत्री सुप्रिया, मध्यप्रदेश में सिंधिया और अजय अर्जुन सिंह, ओड़िशा में नवीन पटनायक, एनटी रामाराव के पुत्र और दामाद चन्द्रबाबू नायडू, छत्तीसगढ़ में महेंद्र कर्मा, बलीराम कश्यप, जोगी और शुक्ल परिवार, नंदकुमार पटेल के वंशज, रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान, हरियाणा में देवीलाल एण्ड कम्पनी, दक्षिण में राजशेखर रेड्डी आदि नेता गण वंश परम्परा को जीवंत रखे हैं चाहे वह योग्य हो या ना हो.
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पर श्रीमती राबड़ी देवी जैसी गृहिणी भी बिहार जैसे प्रदेश का बागडोर संभाल सकती है. इसी प्रकार राजनीति में अनुकंपा नियुक्ति को भी गाँधी परिवार की देन कहा जा सकता है. राजीव गांधी, पूनम महाजन, नवीन पटनायक, देहुति कर्मा, दिनेश कश्यप, राजशेखर रेड्डी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, ओमप्रकाश चौटाला आदि की राजनीति को अनुकंपा नियुक्ति कहा जा सकता है. श्री चंद्राकर ने कहा कि किसी भी देश के विकास में वहां के राजनीतिक व्यक्तियों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण होता है. वैचारिक रूप से परिपूर्ण, देश के प्रति समर्पित व्यक्ति ही देश को मजबूत और विकसित बना सकता है इसलिए भारतीय राजनीति में वंशवाद और अनुकंपा नियुक्ति बंद होनी चाहिए और योग्य व्यक्ति का चुनाव होना चाहिए. कुछ माह के बाद मरवाही में उपचुनाव होना है, जहाँ से वंशवाद और अनुकंपा नियुक्त के चलन को समाप्त करने का संदेश हमें पूरे देश को देना चाहिए.
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