बागबाहरा. पूर्व जनपद अध्यक्ष नरेन्द्र चन्द्राकर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन की मूल थीम नरुवा, गरुवा, घुरुवा, बारी योजना के अनुसार ही गौठान और रोका-छोका योजना को हर गांव में लागू करने जा रही है. गौठान और रोका-छोका योजना के लिए हर गांव में चारागाह भूमि होना जरूरी है, क्योंकि बारहों माह पशु को गौठान में रखकर चारा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता. हर गांव की चारागाह भूमि, गौठान, श्मशानघाट व आम निस्तार की भूमि को उसी गांव के लोग कब्जा कर लिए हैं और कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ शासन राजस्व अमला को सख्त निर्देश दें कि वे पहले भूमाफियाओं के कब्जे से अतिक्रमण हटाएं.
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चन्द्राकर ने कहा कि शासन द्वारा आबंटित भूमि भूमाफियाओं ने बिना कलेक्टर अनुमति बिक्री कर दी है जिसे बड़े-बड़े अधिकारी, नेता, उद्योगपति और बड़े भू-माफियाओं के द्वारा खरीदी है. ये लोग उस भूमि में खेती नहीं करते. भविष्य में अच्छी कीमत मिलने की लालच में चारों तरफ से घेर कर छोड़ देते हैं जिससे मवेशी उससे चारा नहीं ले पाते. सरकारी पट्टे की भूमि राजस्व अमले की मिलीभगत से विक्रय कर दी गई है ऐसी तमाम भूमि की रजिस्ट्री निरस्त की जाए साथ ही सरकारी पट्टे पर दी गई जमीन को रजिस्ट्री विभाग में ऑनलाइन कम्प्यूटरीकृत कर चिंहाकित किया जाए ताकि उक्त जमीन की रजिस्ट्री रोकी जा सके. शासन द्वारा आबंटित शासकीय भूमि को बेचना गैरकानूनी है और ऐसे गैरकानूनी बिक्री को कभी भी निरस्त कर उसे शासन में निहित किया जा सकता है. नरेन्द्र चंद्राकर ने कहा कि इस प्रकार की भूमि हर गांव में सैकड़ों एकड़ में हैं.
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यदि इसे चारागाह के लिए उपलब्ध कराया जाता है तो शासन की योजना सफल होने की संभावना बढ़ सकती है. ऐसा निर्णय कोई भी राजनीतिक दल सहमत होते हुए भी अब तक इसलिए नहीं ले पा रहा है क्योंकि ऐसी भूमि अधिकांश दलों के नेताओं, अधिकारी, उद्योगपति और भू-माफियाओं के द्वारा ही खरीदी गई है. ऐसा कड़ा निर्णय भूपेश बघेल जी की सरकार ले सकती हैं, क्योंकि अब तक उनके कार्यकाल में अनेक कड़े निर्णय लिए गए हैं. बिना चारागाह के छत्तीसगढ़ शासन की मूल योजना गॉठान और रोका-छेका का सफल होना असंभव है. यदि शासन ऐसा निर्णय लेती है तो निश्चित ही किसान भाई और गांव वालों के साथ-साथ पशुपालक शासन के ऐसे निर्णय से लाभान्वित होंगे और पशुपालन, दुग्ध उत्पादन की ओर ध्यान देंगे.







