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क्वारंटाइन सेंटर से निकले लोगों की जाँच रिपोर्ट 5 दिन बाद आई कोरोना पॉजिटिव!

Published on: June 11, 2020
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महासमुंद. छत्तीसगढ़ में विस्फोटक होते जा रहे कोरोना संक्रमण के इस भीषण दौर में भी प्रदेश सरकार और उसके प्रशासन तंत्र की ओर से बरती जा रही लापरवाही के जो नमूने प्रकाश में आ रहे हैं, उन्हें देख-सुनकर दहशत का माहौल बनता जा रहा है. सरायपाली क्षेत्र में क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए 7 लोगों की जाँच रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद क्षेत्र में हर कोई बेहद सशंकित है. इनमें एक महिला भी है जो गर्भवती थी और क्वारंटाइन पीरियड में ही उसने एक शिशु को जन्म दिया था. इन सभी को 24 मई को क्वारंटाइन किया गया था और महिला को छोड़कर शेष लोग क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर 6 जून को घर लौट गए थे. महिला ने चूंकि 25 मई को ही बच्चे को जन्म दिया था, उसे तत्काल पाटसेंद्री के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था.

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अब 10 जून को उन सबकी जो जाँच रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक ये सभी लोग कोरोना पॉज़ीटिव पाए गए हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला को छोड़कर शेष सभी छह लोग इन तीन-चार दिनों की अवधि में मज़े से घूमते रहे, लोगों से मिलते रहे और यहाँ तक कि एक व्यक्ति तो शादी के कार्यक्रम में शरीक होकर भोजन तक परोस चुका है. ज़ाहिर है, अन्य अनेक लोगों के संपर्क में आने के बाद संपर्कित लोग अब दहशत में हैं. सबसे ज़्यादा हैरत तो गुजरात से लौटी गर्भवती महिला के मामले को लेकर जताई जा रही है. उक्त महिला 24 मई क्वारंटाइन सेंटर में रखी गई थी और 25 मई को क्वारंटाइन सेंटर में ही उसने एक बच्चे को जन्म दिया था. सरकारी एम्बुलेंस के पहुंचने तक मजदूर महिला एक बच्चे की मां बन चुकी थी. बाद में सरायपाली बीएमओ के निर्देश पर जच्चा-बच्चा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री में भर्ती कराया गया.

पति-पत्नी दोनों गुजरात मजदूरी करने गए थे, 24 मई को ही वापस आए थे. जहां नियमतः उन्हें 14 दिन के क्वारंटाइन में स्कूल में रहना था, पर सोमवार 25 मई को गर्भवती महिला को क्वारंटाइन सेंटर में ही प्रसव हो गया. जच्चा-बच्चा को बीएमओ के निर्देश पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री में भर्ती कराया गया, जबकि नियमानुसार महिला और बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित आइसोलेशन वार्ड में रखा जाना था. उक्त महिला को 28 मई को होम आइसोलेशन के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रिलीव कर दिया गया था. 26 मई को महिला का स्वाब सैंपल भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट बुधवार 10 जून को पॉज़ीटिव आई है.

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थाना प्रभारी ने नवजात को गोद में लिया ! सबको रहना पड़ सकता है होम आइसोलेट

ख़बर तो यह भी है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री से जच्चा-बच्चा को रिलीव किए जाने के बाद सरायपाली थाना प्रभारी मल्लिका तिवारी उनके गृह ग्राम मिलने पहुंची थीं जहां उन्होंने महिला के बच्चे को गोद में भी लिया था. बहरहाल, सरायपाली बीएमओ डॉ. अमृत द्वारा जच्चा-बच्चा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटसेन्द्री भेजे जाने के निर्णय को अदूरदर्शितापूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके चलते पाटसेन्द्री स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत कर्मचारियों सहित थाना प्रभारी को भी होम आइसोलेशन में जाना पड़ सकता है. इधर, स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बीएमओ डॉ. अमृत की इस लापरवाही के चलते स्वास्थ्यकर्मियों की जान पर खतरे को लेकर उनके विरुद्ध शिकायत किए जाने की बात कही है.

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