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7 लोगों से 65 किलो बांस करील जब्त

Published on: September 2, 2020
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पिथौरा. अर्जुनी वन परिक्षेत्र में बांस करील का परिवहन कर रहे 7 ग्रामीणों को पकड़कर उनसे 65 किलो करील जब्त की गई है. सभी आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है. उप वनमंडलाधिकारी कसडोल उदयसिंह ठाकुर के निर्देश पर परिक्षेत्र अधिकारी अर्जुनी टीआर वर्मा द्वारा अर्जुनी परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल से करील चोरी करने वालो की लगातार धर-पकड़ जारी है. इसके लिए पूरा वन अमला सतत् जंगल में गस्त कर रहा है. विगत सोमवार सुबह 10 बजे अर्जुनी परिक्षेत्र के महराजी परिवृत्त के अंतर्गत उत्तर महराजी परिसर के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 377 में नंदकिशोर वल्द मोतीलाल साहू, छबीलाल वल्द मोतीलाल साहू, राजूराम वल्द हेतराम साहू, विष्णुप्रसाद वल्द जेठूराम कर्ष, सालिकराम वल्द थानूराम पैंकरा, सभी ग्राम महराजी एवं मनोज वल्द विसेसर यादव ग्राम महका के द्वारा 310 नग बांस (पीका) करील (60 किग्रा) तोड़कर बेचने हेतु ले जाया जा रहा था.

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जिसे मौके पर ही वनरक्षक राजेश्वर प्रसाद वर्मा ने सहयोगियों के मदद से पकड़ा और वन अपराध प्रकरण क्रमांक 15572/12 दिनांक 31/08/2020 दर्ज कर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1) के अनुसार कार्रवाई की. इसी प्रकार सोमवार शाम को ही 4:50 बजे महराजी बेरियर के पास आरक्षित कक्ष क्रमांक 377 में ही लक्ष्मण प्रसाद वल्द छोटूराम साहू एवं एक नाबालिग बालक ग्राम महराजी 46 नग बांस पीका (5 किग्रा) को तोड़कर बेचने ले जा रहे थे. जिसे राजेश्वर पैंकरा वनरक्षक परिसर रक्षी एवं सहयोगियों ने पकड़ा. जिसको भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1) के अनुसार कार्रवाई कर वन अपराध प्रकरण क्रमांक 15572/13 दिनांक 31/08/2020 दर्ज किया गया है. उक्त दोनो प्रकरण में जब्त किए गए नाशवान बांस पीका (करील) को जमीन में गड्डा खोदकर दबाया गया. उक्त कार्रवाई में रामकुमार विश्वकर्मा वनपाल, स.प.अ. महराजी, वनरक्षक- राजेश्वर प्रसाद वर्मा, चन्द्रभुवन मनहरे, तृप्ति कुमार जायसवाल, नरोत्तम पैंकरा, सुनीता कंवर एवं दैनिक श्रमिक- भानुलाल बरिहा एवं धीरज केंवट का योगदान रहा. प्रकरण की विवेचना जारी है.

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अर्जुनी के अलावा कही कार्रवाई नहीं

करील बांस के नए कोपल या पिका को ही कहा जाता है जो कि कटे बांस से ही बारिश में स्वमेव निकल जाता है और चंद दिनों में ही यह बांस का रूप ले लेता है. जिससे शासन को आय होती है और इससे बंसोड़ अनेक तरह के समान भी बनाते है पर वन क्षेत्रों में इस पिके को ग्रामीण बढ़ने ही नहीं देते और इसे तोड़कर खाने में उपयोग करते हैं या सब्जी बाजार में बेच देते हैं. इस कार्य को रोकने के सरकारी निर्देशों के बावजूद अफसर इन्हें रोकने का प्रयास ही नहीं करते. पूरे क्षेत्र में मात्र अर्जुनी परिक्षेत्र में ही इसे बेचने वालों पर कार्रवाई कर बांस बचाने के प्रयास होते है. शेष परिक्षेत्रों में इसे तोड़ने-काटने में कोई रोक दिखाई नहीं देती.

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