रजिंदर खनूजा
पिथौरा. महासमुंद एवं बलौदाबाजार जिले के मजदूरों के तमिलनाडु में बंधक होने की सूचना के बाद स्थानीय दलित आदिवासी मोर्चा ने तमिलनाडु के बंधुआ मुक्ति मोर्चा के निर्मल अग्नि तक पूरी बात पहुंचाई. अब मोर्चा ने तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में चल रही श्रीपति पेपर मिल से 33 छत्तीसगढ़िया प्रवासी बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराकर सभी को उनके घर वापस भेज दिया. बीती रात आधे से अधिक मजदूर अपने घर सुरक्षित पहुंच गए. जानकारी के अनुसार उक्त संगठन ने विरुधुनगर प्रशासन के साथ मिलकर 33 मजदूरों को मुक्त कराया.
विगत 4 तारीख को वान मुहील संगठन को जानकारी मिली थी कि छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार एवं महासमुंद जिले के रहने वाले 33 मजदूर जिनमें महिलाएं एवं बच्चे सम्मिलित हैं, को श्रीपति पेपर मिल में जबरदस्ती काम करवाया जा रहा है. इस पर तत्काल ही संगठन ने नेशनल लीगल सेल ऑथोर्टी विरुधुनगर एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर श्रीपति पेपर मिल पर छापा मारा जिसमें लगभग 33 बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाया गया.
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12 हजार महीना का किया था वायदा
मजदूरों के अनुसार उन्हें मानव तस्कर कमल नागर एवं प्रभुलाल बारिक ने उन्हें झांसा दिया एवं इन मजदूर परिवारों को छत्तीसगढ़ से तमिलनाडु ले आए. उन्हें बताया गया कि 8 घंटे के काम का दाम 12000 रुपए प्रति मजदूर को भुगतान किया जाएगा पर वादे के अनुसार यहां सब कुछ उल्टा ही निकला 8 घंटे की जगह मजदूरों को 12 घंटे से ज्यादा प्रतिदिन के हिसाब से काम करना पड़ा और 12000 की जगह मजदूरों के नसीब में फूटी कौड़ी भी नहीं मिली. तब परेशान मजदूरों ने मानव तस्कर कमल नागर एवं प्रभुलाल बारिक श्रीपति पेपर मिल के मालिक के साथ मिले होने की जानकारी मिली. क्योंकि मिल मालिक मजदूरों से बेगारी करवाता रहा.
बंधुआ मजदूर जिला महासमुंद निवासी रामकुमार तथा जिला बालौदबाजार निवासी हीरा बाई ने बताया कि हमें श्रीपति पेपर मिल में बनी नालियों को साफ करवाया जाता था. मजदूरों को जिस काम को करवाने के लिए बुलाया गया वो काम उनको नहीं मिला. ऐसी स्थिति में मजदूरों ने वान मुहिल संगठन के साथ संपर्क किया. जिले के मजदूरों के परिजनों ने जिला प्रशासन के साथ दलित आदिवासी मोर्चा के राजिम तांडी एवं देवेंद्र बघेल को जानकारी दी. इसके बाद तमिलनाडु के उक्त संगठन ने मजदूरों को मुक्ति दिलाई. मजदूरों के बयान के अनुसार मिल वालों ने मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया एवं न ही उन्हें मजदूरी ही दी गई. तमिलनाडु के प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों को उनके पैतृक गांव तक पहुंचाने के लिए एक बस की व्यवस्था की जिसमें बैठकर तमाम मजदूर शनिवार रात छत्तीसगढ़ पहुंच गए हैं.
मजदूरी के लिए कोर्ट में गुहार
वर्तमान में नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर ईंरेडिकेशन ऑफ़ बोंडेड लेबर मजदूरों बकाया मज़दूरी भुगतान, मुक्ति प्रमाण पत्र, मालिक एवं ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए संघर्षं कर रही है. नेशनल कैंपन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर के कन्वीनर निर्मल अग्नि ने बताया कि मुफ्त बंधुआ मजदूरों को यदि मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया तो वो दोहरे बंधुआ मजदूर बनकर किसी अन्य राज्य में बंधुआ मजदूरी करते पुनः पाए जाएंगे इसलिए विरुधुनगर प्रशासन एवं तमिलनाडु सरकार को कमेटी ने गुजारिश की है कि वे जल्द ही मुक्त बंधुआ मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र एवं तत्काल सहायता राशि जारी करें साथ ही छत्तीसगढ़ एवं तमिलनाडु की सरकार को संगठन ने पत्र भेजकर जल्द ही माइग्रेंट लेबर पॉलिसी बनाने के लिए निवेदन किया है ताकि मजदूरों को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के चक्र में फंसने से बचाया जा सके.
छत्तीसगढ़ के रहने वाले मजदूरों का पलायन लगातार छत्तीसगढ़ से अन्य कई राज्यों में जारी है जहां मानव तस्करी बहुत आसानी से ही रही है इसलिए छत्तीसगढ़ की सरकार को पहल करके गुलामी के तंत्र को तोड़ने की मिसाल कायम करनी चाहिए. मजदूरों द्वारा किए गए काम की मजदूरी उन्हें नहीं दी गई है जिसके लिए वे शीघ्र ही तमिलनाडु उच्च न्यायालय में पिटीशन दायर करेंगे. दलित आदिवासी मोर्चा के संयोजक देवेंद्र बघेल ने बताया कि उक्त मजदूरों के अलावा 12 अन्य मजदूरों को भी छुड़वाने के प्रयास हो रहे हैं. इनमें सात मजदूरों को मुक्त कराकर वापस उनके घरों को भेज दिया गया है. शेष पांच मजदूरो की तलाश की जा रही है.
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