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मीडिया वालों के नाम पर रेत चोरों से 20-20 हजार रुपए की उगाही!!!

Published on: June 5, 2021
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महासमुंद. महासमुंद क्षेत्र में मीडिया वालों को मैनेज करने के नाम पर रेत का अवैध भंडारण करने वालों से 20-20 हजार रुपए की उगाही की जा रही है. विश्वस्त सूत्रों का यह भी कहना है कि बिरकोनी क्षेत्र में रेत का अवैध भंडारण करने देने के लिए भी रुपए वसूले गए हैं, वहीं बरसात में अधिक दाम पर बिक्री होगी ही, तो उस पर अलग से कमीशन भी देना तय किया गया है. अब ये वसूली कौन कर रहा है, इस प्रश्न का कोई मतलब नहीं, सब जानते हैं सारा पैसा क्षेत्र के सियासी मठ में अर्पण हो रहा है. दो महीने पहले जब बिरकोनी में रेत के अवैध भंडारण का मुद्दा पहली बार मीडिया में उठा था और सीएम तक से सवाल पूछा गया था, तब भी मीडिया वालों को मौन करने के लिए भी इसी सियासी मठ से मनी मंत्र फूंका गया था.

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उसके लिए भी रेत चोरों से उगाही की गई थी. रेत चोर इसे उगाही नहीं सरंक्षण के बदले समर्पण ही मानते हैं. वे इस खुशफहमी में होते हैं कि मनी मंत्र से मीडिया वाले मौन रहेंगे और वे धड़ल्ले से रेत लूटकर मालामाल हो जाएंगे. अचानक कोरोना का कहर बढ़ा और जिले में लॉकडाउन हो गया. अनेक मीडिया वाले और उनके परिवार भी कोरोना की चपेट में आ गए. प्रशासन के साथ ही मीडिया का पूरा फोकस कोरोना पर रहा. रेत के अवैध कारोबारियों ने आपदा में अवसर बनाया. बरबसपुर रेत घाट जिसकी पर्यावरण एनओसी 13 अप्रैल को खत्म हो चुकी, वहां से अवैध रूप से रेत उत्खनन जारी रखा गया. जब जिले में चिकित्सा को छोड़कर सारी गतिविधियां बंद थी, तब बरबसपुर के अवैध रेत घाट से दिन-रात रेत लूटी जा रही थी और सारी रेत बरबसपुर, बिरकोनी में स्टाक की जा रही थी. रेत डम्प करने के लिए निजी जमीन नहीं बची तो सरकारी घास भूमि, पौधरोपण वाली भूमि, खेल मैदान, गौठान, चारागाह, औद्योगिक क्षेत्र के सुरक्षित प्लाटों पर भी रेत डम्प कर दी गई. यहां तक कि जो औद्योगिक प्लाट सीधे तौर पर उद्योग विभाग के पजेशन में है, वहां का भी जबरिया ताला तोड़कर रेत भर दी गई है. जहां विद्युत सब-स्टेशन बनना है, उस प्लाट में भी हजारों ट्रक रेत डम्प कर दी गई है.

जब जगह कम पड़ती गई तो रेत के पहाड़ बनते गए और आज हालात यह हैं कि रेत के ये अवैध पहाड़ हरे-भरे पेड़-पौधों को निगलते जा रहे हैं. यहां तक कि बरगद के ऊंचे-ऊंचे वृक्ष भी दबते जा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि अकेले बिरकोनी में लगभग 125 एकड़ रकबे में करीब 80 हजार ट्रक रेत डम्प हो चुकी है. ‘छत्तीसगढ़ जनादेश’ ने इसे पहले की भांति प्रमुखता से प्रकाशित किया. इससे रेत का अवैध उत्खनन और भंडारण करने वालों में खलबली मच गई. इस बीच मां चंडी समिति ने भी शिकायत कर दी कि उनके द्वारा बड़ी मुश्किल से बचाई गई हरियाली को रेत के पहाड़ खड़े कर मिटाया जा रहा है. इसके बाद सियासी मठ ने रेत का अवैध भंडारण करने वालों पर आंखें तरेरी कि हमारा नाम खराब करने पर तुले हुए हो.

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रायपुर से सीएसआईडीसी के अधिकारी भी मौका देखने आ गए. खनिज विभाग की टीम भी सूंघने पहुंच गई. अब खनिज विभाग रेत चोरों को चुपके से भंडारण की अनुमति प्रदान कर रहा है! और ये रेत चोर इस अनुमति को पाकर चोरी और सीनाजोरी की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं. खनिज अधिकारी सवालों से बच रहे हैं. मीडिया वाले उन्हें ढूंढ रहे हैं, मग़र वे मिलते नहीं. फोन पर हमेशा यही कहते हैं कि फील्ड में हूं. पर न तो वे बरबसपुर, बिरकोनी में होते हैं न सांकरा जोंक में. जिस फील्ड में उन्हें होना चाहिए वहां तो होते नहीं, तो किस फील्ड में होते हैं यह शोध का विषय हो सकता है. बहरहाल, रेत का अवैध उत्खनन और भंडारण करते हुए गांवों को रेगिस्तान का शक्ल देने वाले सत्ता पोषित रेत चोरों की करतूत अब पूरे प्रदेश में जाहिर हो चुकी है. सवाल सिर्फ रेत का नहीं है, सवाल कानून और व्यवस्था का है. ऐसा प्रतीत होता है कि महासमुंद क्षेत्र में अवैध कारोबारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा धीरे-धीरे माफियागीरी का रूप लेती जा रही है. जिम्मेदारों जागो, अब भी समय है.
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